डॉ. विजय गर्ग

पुस्तकें केवल कागज का टुकड़ा नहीं हैं, बल्कि वे मानव सभ्यता के प्रतीक हैं जिनमें सदियों का अनुभव और ज्ञान समाहित है। आज के डिजिटल युग में भी पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है, बल्कि बढ़ गया है। मानव जीवन में पुस्तकों का महत्व पुस्तकें हमारे सबसे अच्छे मित्र हैं। वे हमें कभी अकेलापन महसूस नहीं करने देतीं और बिना किसी शर्त के ज्ञान बांटती हैं। ज्ञान का भंडार: पुस्तकों के माध्यम से हम दुनिया के किसी भी कोने के इतिहास, विज्ञान और संस्कृति को जान सकते हैं। व्यक्तित्व का विकास: अच्छी पुस्तकें व्यक्ति की सोचने की क्षमता को बढ़ाती हैं और उसे नैतिक मूल्यों की शिक्षा देती हैं। मानसिक शांति: एक अच्छी कहानी या कविता पढ़ने से मन शांत हो जाता है और तनाव कम होता है। पुस्तकों के बदलते रूप समय के साथ पुस्तकों के रूप में काफी बदलाव आया है। जहां पहले केवल हस्तलिखित या मुद्रित पुस्तकें होती थीं, पुस्तकें मनुष्य की सबसे वफादार साथी हैं। ये वे दर्पण हैं जिनमें मनुष्य अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य को देख सकता है। पुस्तकों के पृष्ठों में न केवल अक्षर होते हैं, बल्कि सदियों का अनुभव, विचार की गहराई और जीवन की बुद्धिमत्ता समाहित होती है।

जब कोई व्यक्ति पुस्तक पढ़ता है, तो वह न केवल जानकारी ग्रहण करता है, बल्कि सोचना, समझना और विश्लेषण करना भी सीखता है। पुस्तकें हमें नए विचारों से जोड़ती हैं, हमारे भीतर प्रश्न उत्पन्न करती हैं और उनके उत्तर खोजने के लिए प्रेरणा देती हैं। इतिहास की पुस्तकें हमें पिछले समय के अनुभव बताती हैं, विज्ञान की पुस्तकें सोच को तर्कसंगत बनाती हैं और साहित्य की पुस्तकें मानव संवेदनाओं को गहराई से छूती हैं।

पुस्तकों का सबसे बड़ा गुण यह है कि वे चुपचाप सिखाती हैं। कोई शोर नहीं, कोई दबाव नहीं – केवल पाठक और पृष्ठों के बीच एक अ नोखा संवाद। यही कारण है कि कठिन परिस्थितियों में किताबें एक व्यक्ति को प्रोत्साहित करती हैं और सही रास्ता दिखाती हैं।

आज के डिजिटल युग में जानकारी हर जगह उपलब्ध है, लेकिन पुस्तकों का महत्व अभी भी कायम है। क्योंकि पुस्तकें न केवल सूचना देती हैं, बल्कि ज्ञान प्रदान करती हैं। ज्ञान जो सोच को दृढ़ करता है और व्यक्तित्व को निखारता है।

सचमुच, पुस्तकें पृष्ठों में निहित ज्ञान हैं। जो मनुष्य पुस्तकों से मित्रता करता है, वह कभी भी अज्ञानता के अंधकार में नहीं रहता।

डॉ. विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य शैक्षिक स्तंभकार मलोट पंजाब

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