जीवनशैली सुधारकर और अग्न्याशय को सक्रिय कर मधुमेह पर नियंत्रण
यूथ इंडिया
आज की बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और शारीरिक निष्क्रियता के कारण मधुमेह (डायबिटीज़) तेजी से फैलती बीमारी बन चुकी है। चिकित्सकों के अनुसार, यदि समय रहते शुगर को नियंत्रित न किया जाए तो यह हृदय, किडनी, आंखों और नसों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में दवाओं के साथ-साथ योग शुगर से बचाव और नियंत्रण का एक सुरक्षित, प्राकृतिक और प्रभावी उपाय माना जा रहा है।
डायबिटीज़ क्यों होती है
विशेषज्ञ बताते हैं कि शुगर होने के प्रमुख कारणों में—
शारीरिक गतिविधि की कमी
मोटापा और पेट की चर्बी
असंतुलित और अधिक मीठा भोजन,
मानसिक तनाव और अनिद्रा
हार्मोनल असंतुलन
शामिल हैं। योग इन सभी कारणों पर एक साथ सकारात्मक प्रभाव डालता है।
शुगर नियंत्रण में लाभकारी योगासन,
मंडूकासन (मेंढक आसन),
यह आसन अग्न्याशय (पैंक्रियास), को सक्रिय करता है, जिससे इंसुलिन स्राव बेहतर होता है। शुगर रोगियों के लिए इसे अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
पश्चिमोत्तानासन:इससे पेट की चर्बी कम होती है और पाचन तंत्र मजबूत होता है, जिससे रक्त शर्करा संतुलित रहती है।
भुजंगासन:रीढ़ और पेट के अंगों को सक्रिय करता है, जिससे मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है।
वज्रासन:भोजन के बाद करने से पाचन सुधरता है और ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है।
कपालभाति:यह शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालता है और वजन कम करने में मदद करता है, जिससे शुगर नियंत्रण आसान होता है।
अनुलोम-विलोम:तनाव कम कर हार्मोनल संतुलन बनाए रखता है, जो शुगर नियंत्रण के लिए आवश्यक है।
भ्रामरी प्राणायाम: मानसिक शांति देता है और तनाव से बढ़ने वाली शुगर को नियंत्रित करता है।
योग विशेषज्ञों का कहना है कि केवल योग ही नहीं, बल्कि जीवनशैली में सुधार भी जरूरी है—
नियमित समय पर भोजन
मीठा, तला-भुना और जंक फूड सीमित करें,फाइबर युक्त आहार और पर्याप्त पानी,रोज़ाना हल्की सैर या व्यायाम,
पूरी नींद और तनावमुक्त दिनचर्या
कितने समय में दिखता है असर
नियमित योग और प्राणायाम से 6 से 8 सप्ताह में ब्लड शुगर स्तर में सुधार देखा जा सकता है। लंबे समय तक अभ्यास से दवाओं की मात्रा घट सकती है, लेकिन यह निर्णय डॉक्टर की सलाह से ही लिया जाना चाहिए।
मधुमेह से बचाव और नियंत्रण में योग एक मजबूत आधार प्रदान करता है। योग न केवल शुगर को नियंत्रित करता है, बल्कि शरीर, मन और जीवनशैली को संतुलित कर रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है। नियमित योग अभ्यास और संयमित जीवनशैली अपनाकर मधुमेह के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।





