शरद कटियार
भारत दुनिया का सबसे प्राचीन और सबसे विविध देश है। यहाँ भाषा बदलती है, बोली बदलती है, खान-पान बदलता है और परंपराएँ बदलती हैं। लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि भारत में 6743 जातियाँ मौजूद हैं। यह संख्या हमारी सामाजिक विविधता को दर्शाती है, लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि एकजुट रहना हमारे लिए कितना बड़ा संघर्ष और कितना बड़ा दायित्व है।
जाति व्यवस्था का मूल उद्देश्य समाज को व्यवस्थित करना था। यह काम, जिम्मेदारी और सामाजिक संतुलन के लिए बनाई गई थी। लेकिन समय के साथ यह व्यवस्था विभाजन का औज़ार बन गई।आज स्थिति यह है कि इंसान को उसके कर्म से नहीं, उसकी जाति से पहचाना जाता है। यही सोच धीरे-धीरे समाज को भीतर से खोखला कर रही है।
जातिवाद से राष्ट्रवाद की ओर
जब तक हमारी सोच जातिवाद तक सीमित रहेगी, तब तक भारत केवल जनसंख्या में बड़ा रहेगा, सोच में नहीं।राष्ट्रवाद का अर्थ किसी जाति, धर्म या वर्ग का वर्चस्व नहीं होता।
राष्ट्रवाद का अर्थ है—देश को सर्वोपरि रखना।
अगर हर नागरिक पहले भारतीय बने और बाद में अपनी जाति की पहचान रखे, तो भारत की दिशा अपने-आप बदल जाएगी।
6743 जातियाँ कोई अभिशाप नहीं हैं। यह भारत की शक्ति भी बन सकती हैं—बशर्ते हम इन्हें बाँटने का कारण न बनाएँ।जब यही जातियाँ एक लक्ष्य के लिए खड़ी होंगी,तो भारत की कोई तुलना नहीं कर पाएगा।लेकिन जब यही जातियाँ राजनीतिक स्वार्थों के लिए आमने-सामने खड़ी कर दी जाती हैं,
तो राष्ट्र कमजोर होता है।
राजनीति और जाति का गठजोड़
आज की राजनीति ने जाति को वोट बैंक बना दिया है।नेताओं के लिए जाति साधन है, लेकिन आम आदमी के लिए यह जंजीर बन गई है।हमें यह समझना होगा कि जो लोग जाति के नाम पर हमें बाँटते हैं,वे कभी देश को जोड़ नहीं सकते।
विश्व गुरु बनने की शर्त विश्व गुरु बनने के लिए केवल आर्थिक विकास पर्याप्त नहीं है।इसके लिए सामाजिक एकता, राष्ट्रीय चरित्र और सामूहिक सोच जरूरी है।जब हम खुद आपस में बँटे होंगे,तो दुनिया हमें नेतृत्व क्यों देगी?
विश्व गुरु वही बनता है
जो अपने भीतर एक होता है।
सेना और किसान से सीख
हमारी सेना सीमा पर यह नहीं पूछती कि देश किस जाति का है।
किसान खेत में यह नहीं देखता कि
अन्न किस जाति के लिए उगाया जा रहा है।तो फिर समाज में यह सवाल क्यों ज़िंदा है?
आज भारत का युवा तय करेगा कि
देश जाति की राजनीति में उलझेगा
या राष्ट्र निर्माण की राह पर चलेगा।
जाति से ऊपर उठकर सोचना सीख ले,तो कोई ताकत भारत को विश्व गुरु बनने से रोक नहीं सकती।सीधी बात, साफ संदेश देश को आगे बढ़ाना है
तो जाति नहीं, राष्ट्र चुनना होगा।
वोट देते समय,बोलते समय,सोचते समय—हमें यह याद रखना होगा किहम पहले भारतीय हैं।
6743 जातियों वाला यह देश
तभी महान बनेगा,
जब वह एक राष्ट्र की तरह सोचेगा।
जाति हमारी पहचान हो सकती है,
लेकिन राष्ट्र हमारी आत्मा है।
अगर हम जातिवाद से ऊपर उठकर
राष्ट्रवाद को अपनाएँ,तो वह दिन दूर नहीं जब भारत को दुनिया
विश्व गुरु कहेगी।
जय हिंद।





