प्रभात यादव
आपका शांत मन आपके लिए संसार की सबसे शक्तिशाली औषधि है।
यह कोई भावुक पंक्ति नहीं, बल्कि जीवन का सीधा-सा सत्य है।
मनुष्य अपने जीवन में अधिकतर समस्याओं का समाधान बाहर खोजता है—डॉक्टरों के पास, दवाइयों में, सुविधाओं में, पैसे में, पद में। वह यह मान लेता है कि यदि परिस्थितियाँ बदल जाएँगी तो उसका दुख भी समाप्त हो जाएगा। लेकिन अनुभव बताता है कि परिस्थितियाँ बदलने के बाद भी बेचैनी बनी रहती है। कारण साफ है—समस्या बाहर नहीं, भीतर के अशांत मन में होती है।
जब मन अशांत होता है तो छोटी-सी बात बड़ी लगने लगती है। बात-बात पर क्रोध आता है, निर्णय जल्दबाज़ी में होते हैं और पछतावा साथ चलता है। अशांत मन शरीर को भी बीमार करता है। तनाव, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, सिरदर्द, घबराहट—इन सबकी जड़ अक्सर मन की अस्थिरता ही होती है। दवाइयाँ राहत दे सकती हैं, लेकिन स्थायी समाधान तभी मिलता है जब मन शांत होता है।
शांत मन का अर्थ यह नहीं है कि जीवन में कोई समस्या नहीं है। समस्याएँ तो सभी के जीवन में होती हैं। अंतर केवल इतना है कि शांत मन वाला व्यक्ति समस्या से घबराता नहीं, बल्कि उसका समाधान खोजता है। वह परिस्थितियों का गुलाम नहीं बनता, बल्कि उन्हें समझकर निर्णय लेता है। शांत मन सोच को स्पष्ट करता है और भावनाओं पर नियंत्रण सिखाता है।
आज का समय अत्यधिक भागदौड़ और तुलना का समय है। हर व्यक्ति किसी न किसी से आगे निकलने की दौड़ में लगा है। इस दौड़ में मन को आराम देने का समय ही नहीं मिलता। मोबाइल, सोशल मीडिया, समाचार, अफवाहें—हर समय मन को उत्तेजित करती रहती हैं। धीरे-धीरे बेचैनी आदत बन जाती है और शांति अजनबी। जबकि सच यह है कि मन को शांति देना भी उतना ही आवश्यक है, जितना शरीर को भोजन देना।
शांत मन पाने के लिए किसी कठिन साधना की आवश्यकता नहीं। कुछ सरल आदतें ही पर्याप्त हैं—
अपने भीतर चल रहे विचारों को पहचानना,हर बात पर तुरंत प्रतिक्रिया न देना,
जो नहीं बदला जा सकता उसे स्वीकार करना,और जो बदला जा सकता है उसके लिए धैर्य से प्रयास करना।
जब व्यक्ति स्वयं से ईमानदार होता है, तो मन अपने-आप हल्का होने लगता है। अपेक्षाएँ कम होते ही तनाव घटने लगता है। दूसरों को दोष देने के बजाय अपनी भूमिका समझने से क्रोध कम होता है। यही प्रक्रिया मन को धीरे-धीरे शांत करती है।
शांत मन रिश्तों को भी बेहतर बनाता है। जहाँ मन शांत होता है, वहाँ संवाद मधुर होता है, विवाद कम होते हैं और विश्वास बना रहता है। ऐसे व्यक्ति के पास लोग सलाह लेने आते हैं, क्योंकि उसके शब्दों में आवेग नहीं, अनुभव और संतुलन होता है।
सबसे बड़ी बात—शांत मन वाला व्यक्ति जीवन से हारता नहीं। वह हर परिस्थिति में स्वयं को संभालना जानता है। वह जानता है कि हर युद्ध लड़ना ज़रूरी नहीं और हर अपमान का उत्तर देना भी आवश्यक नहीं। यह समझ केवल शांत मन से ही आती है।
अंत में बात बिल्कुल सीधी है—
यदि मन शांत है, तो जीवन संभाल में है।यदि मन अशांत है, तो सारी उपलब्धियाँ भी बोझ लगने लगती हैं।
इसलिए अपने जीवन में सबसे पहले अपने मन की देखभाल कीजिए।क्योंकि आपका शांत मन ही आपके लिए संसार की सबसे शक्तिशाली औषधि है।





