विकास कटियार
आज का युवा अपने अधिकारों को लेकर पहले से कहीं अधिक सजग है। यह एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि अधिकारों की समझ लोकतंत्र की बुनियाद को मज़बूत करती है। लेकिन अधिकारों के साथ यदि कर्तव्यों की चेतना न जुड़े, तो वही सजगता धीरे-धीरे असंतोष और अव्यवस्था में बदल सकती है। सच यह है कि एक जागरूक युवा वही होता है, जो सवाल भी करता है और समाधान का हिस्सा भी बनता है।
यह दौर तेज़ रफ्तार का है। सूचनाएँ पल भर में पहुँचती हैं, प्रतिक्रियाएँ तुरंत दी जाती हैं और फैसले अक्सर भावनाओं के आवेग में ले लिए जाते हैं। ऐसे समय में युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती है—संयम और विवेक। अफवाह, नफ़रत और उकसावे की राजनीति का सबसे आसान शिकार युवा ही बनते हैं। अधूरी जानकारी, भ्रामक वीडियो और भड़काऊ बयान युवा ऊर्जा को रचनात्मक दिशा से भटका सकते हैं। इसलिए आज जिम्मेदारी केवल बोलने की नहीं, बल्कि सोच-समझकर बोलने और लिखने की है।
लोकतंत्र को मज़बूत करने में युवाओं की भूमिका केवल चुनावी मौसम तक सीमित नहीं हो सकती। मतदान करना नागरिक कर्तव्य है, लेकिन उसके बाद भी सामाजिक संवाद, जनहित के मुद्दों पर सहभागिता और ज़मीनी स्तर पर सक्रियता उतनी ही आवश्यक है। केवल सोशल मीडिया पर पोस्ट लिख देना या ट्रेंड चलाना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक बदलाव तब आता है, जब युवा शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर सक्रिय भागीदारी निभाते हैं।
परिवार, समाज और देश—तीनों की उम्मीदें युवाओं से जुड़ी होती हैं। युवा यदि नशा, हिंसा और निराशा की ओर बढ़ता है, तो उसका असर केवल उसके जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करता है। इसके विपरीत, जब युवा शिक्षा, कौशल, स्वास्थ्य और नैतिक मूल्यों को अपनाता है, तो वही समाज की सबसे मजबूत पूंजी बन जाता है।
जिम्मेदारी का अर्थ यह नहीं कि युवा सवाल पूछना छोड़ दे या अन्याय को स्वीकार कर ले। जिम्मेदारी का अर्थ है—सवालों के साथ समाधान खोजना, विरोध के साथ विकल्प प्रस्तुत करना और असहमति के साथ संवाद बनाए रखना। यही संतुलन युवा चेतना को परिपक्व बनाता है।
अंततः, युवा वही नहीं होता जो उम्र में छोटा हो, युवा वह है जो सोच में बड़ा हो, निर्णय में परिपक्व हो और कर्म में ईमानदार हो। यदि आज का युवा अपनी जिम्मेदारी समझ ले, तो देश को मज़बूत बनाने के लिए किसी अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता नहीं पड़ेगी—कल का भारत अपने आप सशक्त, संवेदनशील और स्थिर बन जाएगा।






