डॉ विजय गर्ग
शुक्र ग्रह पर एक ‘क्रेटर’ का नाम जोशी है। धरती पर मुख्यधारा की आबादी में जिस काम में सिद्धहस्त होना पुरुषों के लिए सहज गौरव की बात होती है, वहां महिलाओं के लिए पूरा असहजता का आसमान होता है। आज किसी महिला डाक्टर का नाम सुनते ही दिल में सम्मान का भाव आता है । पर महिलाओं के लिए यह भाव हासिल करना उतना आसान नहीं था । इस राह पर चलने के लिए आनंदी गोपाल जोशी ने इतनी मुश्किलें उठाई कि उनके सम्मान में शुक्र ग्रह के ‘क्रेटर’ का नाम रखा गया। आनंदी गोपाल का जन्म 31 मार्च 1865 को महाराष्ट्र के कल्याण में हुआ था । उनका बचपन का नाम
यमुना बाई था। महज नौ साल की उम्र में यमुना का विवाह गोपाल राव जोशी से हुआ । गोपाल राव जोशी ने अपनी ब्याहता को आनंदी बाई का नाम दिया । गोपाल राव प्रगतिशील मानसिकता के इंसान थे व स्त्री शिक्षा के महत्त्व को समझते थे । उन्होंने अपनी बालिका वधू को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया । चौदह साल की उम्र में आनंदी ने एक बच्चे को जन्म दिया,
जिसकी मृत्यु हो गई। अपने नवजात की मृत्यु का आघात मिलने के बाद आनंदी ने डाक्टर बनने का संकल्प लिया । गोपाल राव जोशी तत्कालीन समय में हर तरह की संकीर्णताओं से मुक्त थे । उन्हें अहसास था कि डाक्टरी की पढ़ाई विदेश में करनी जरूरी है । पति के सहयोग और अपनी मेहनत से आनंदी गोपाल ने 1886 में अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में मेडिकल कालेज से एमडी की उपाधि हासिल की। वे भारत लौटीं और यहां कोल्हापुर के अल्बर्ट एडवर्ड अस्पताल में महिला वार्ड की प्रभारी बनीं । कुदरत की विडंबना रही कि जिस स्त्री ने स्त्रियों का जीवन लंबा और सेहतमंद करने के लिए इतना संघर्ष किया, उसकी फरवरी 1887 में महज 22 साल में तपेदिक से मृत्यु हो गई।
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब


