विपिन गुप्ता
मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। समस्या मेहनत में नहीं, बल्कि हमारी सोच में होती है। आज का समय ऐसा है कि लोग जल्दी पैसा कमाने के चक्कर में अपनी असली ताकत भूल जाते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि पैसे के पीछे भागने से पहले खुद को मजबूत बनाना ज़रूरी है।
जब इंसान अपने काम, अपने हुनर और अपने व्यवहार पर ध्यान देता है, तो वह धीरे-धीरे आगे बढ़ता है। सफलता पहले आती है, पैसा बाद में। पैसा किसी की मेहनत का इनाम होता है, मंज़िल नहीं। जो लोग इस बात को समझ लेते हैं, वे ज़्यादा दूर तक जाते हैं।
कई बार हम दूसरों से तुलना करने लगते हैं। कोई आगे निकल गया तो जलन होती है, कोई सफल हो गया तो बुरा लगता है। दूसरों की लकीर मिटाने की यही सोच हमारी ऊर्जा को खत्म कर देती है। इससे न तो आगे बढ़ते हैं और न ही मन को शांति मिलती है।
अगर वही ऊर्जा अपने विकास में लगाई जाए—नई चीज़ें सीखने में, खुद को बेहतर बनाने में, ईमानदारी से काम करने में—तो वही ऊर्जा सृजन बन जाती है। यही सृजन एक दिन पहचान बनता है।
जो व्यक्ति चुपचाप मेहनत करता है, समय की कद्र करता है और अपने लक्ष्य पर डटा रहता है, वही आगे चलकर चमकता है। उसकी सफलता शोर नहीं मचाती, लेकिन सबका ध्यान ज़रूर खींचती है।
इसलिए ज़रूरत इस बात की है कि हम दूसरों को देखने के बजाय खुद पर काम करें। तुलना छोड़ें, जलन छोड़ें और धैर्य के साथ आगे बढ़ें। जब आपकी लकीर लंबी होगी, तो सफलता, पैसा और सम्मान—तीनों अपने आप आपके पास आएंगे।


