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Tuesday, February 10, 2026

बहुभाषावाद को बढ़ावा

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डॉ विजय गर्ग

भारत में उच्च शिक्षा को अधिक समृद्ध और बहुभाषिक बनाने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने एक नई पहल की है। ‘एक और भारतीय भाषा सीखें’ पहल के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्रों, नौकरी कर रहे लोगों को मातृभाषा या पढ़ाई की भाषा अतिरिक्त एक अन्य भारतीय भाषा सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। केंद्र सरकार की भारतीय भाषा समिति की पहल का उद्देश्य छात्रों और शिक्षकों के भाषा कौशल को बढ़ाना, अंतर-सांस्कृतिक समझ को मजबूत करना और रोजगार के नए अवसर खोलना है। संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भारतीय भाषाओं को इसमें रखा गया है। यूजीसी ने इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए सभी राज्यों के उच्च शिक्षण संस्थानों को नए शैक्षणिक सत्र (2026-27 ) में ज्यादा से ज्यादा भारतीय भाषाओं से जुड़े पाठ्यक्रमों को शुरू करने को कहा है।

इन पाठ्यक्रमों को बेसिक, इंटरमीडिएट और एडवांस तीन स्तरों में विभाजित

किया गया है, जो आनलाइन एवं आफलाइन दोनों तरीके से संचालित होंगे। इसमें 16 साल अधिक आयु वर्ग और कम से कम 12वीं की पढ़ाई वाले जुड़ सकते हैं। इन पाठ्यक्रमों का मुख्य फोकस बोलने, पढ़ने और लिखने में प्रभावी संचार कौशल विकसित करना होगा। यदि कोई संस्थान आनलाइन कोर्स करवाता है तो इसमें कहीं से किसी को भी कोर्स में जुड़ने की अनुमति होगी। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर का भाषा शिक्षण एप और पोर्टल भी बनेगा।

बहुभाषी व्यक्ति विभिन्न संस्कृतियों, विचारों और समुदायों के बीच एक कड़ी के रूप में काम करते हैं। इसी कारण समाज में उन्हें विशेष सम्मान मिलता है। एक से अधिक भारतीय भाषाएं सीखने से लोगों को अन्य राज्य में जाने पर स्थानीय

भाषा संबंधी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता । बहुभाषी शिक्षा विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के बीच परस्पर समझ एवं सम्मान को बढ़ावा देती है, जिससे भारत में सामाजिक एकता और सद्भाव को भी बढ़ावा मिलता है। एक से अधिक भाषाएं सीखने से मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और रचनात्मकता को बढ़ावा मिलता है। ऐसे में देश के सभी विश्वविद्यालयों, कालेजों, तकनीकी और प्रबंधन संस्थानों को नई पीढ़ी को एक से अधिक भारतीय भाषाएं सीखने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। उन्हें छात्रों को यह बताना होगा कि भारत में सभी भाषाओं का समान महत्व है। यह पहल छात्रों को बहुभाषी समाज बनाने की दिशा में प्रेरित करेगी। इससे अंतर- सांस्कृतिक समझ बढ़ेगी, संचार कौशल बेहतर होगा और उन्हें अलग- अलग राज्यों में नौकरी के अवसर प्राप्त होंगे। देश में लोगों के बीच सांस्कृतिक, कारोबारी जुड़ाव और ज्यादा मजबूत होगा, जिससे विकसित भारत का सपना सच होने में मदद मिलेगी।

डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब

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