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Tuesday, April 7, 2026

ट्रंप की धमकियों के बीच जनता को ढाल बनाने की तैयारी?

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तेहरान
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने संभावित हमलों से निपटने के लिए एक अनोखी रणनीति सामने रखी है। सरकार से जुड़े एक मंत्री ने नागरिकों से देश के महत्वपूर्ण पावर प्लांट्स के चारों ओर मानव शृंखला बनाने की अपील की है।

यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है। ट्रंप ने ईरानी परमाणु संयंत्रों और बुनियादी ढांचे पर हमले की समयसीमा तय कर अल्टीमेटम जारी किया है।

ईरान ने हालांकि इस अल्टीमेटम को खारिज कर दिया है और किसी भी दबाव में झुकने से साफ इनकार किया है। सरकार का कहना है कि वह अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगी।

ईरानी अधिकारियों का मानना है कि पावर प्लांट और अन्य सार्वजनिक ढांचे देश की “राष्ट्रीय पूंजी” हैं, जिनकी रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए कहा गया है।

सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित संदेश में उपमंत्री अलीरेजा रहीमी ने युवाओं, खिलाड़ियों, कलाकारों और छात्रों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विरोध नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा का सवाल है।

ईरान ने सार्वजनिक ढांचे पर संभावित हमलों को “युद्ध अपराध” करार दिया है। अधिकारियों का कहना है कि अगर ऐसे हमले होते हैं, तो उनके गंभीर अंतरराष्ट्रीय परिणाम हो सकते हैं।

बताया गया है कि सात अप्रैल को दोपहर 2 बजे (स्थानीय समयानुसार) देशभर में पावर प्लांट्स के पास मानव शृंखला बनाने की योजना है। इससे दुनिया को एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की जा रही है।

यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने ऐसी रणनीति अपनाई हो। पहले भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के समय नागरिकों को न्यूक्लियर साइट्स के आसपास इकट्ठा किया गया था।

साल 2005-2006 के दौरान इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के साथ विवाद के समय भी छात्रों और समर्थकों ने मानव शृंखलाएं बनाई थीं। उस वक्त यूरेनियम संवर्धन को लेकर तनाव चरम पर था।

इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दबाव के दौरान भी ईरान में बड़े पैमाने पर जन प्रदर्शन हुए थे, जिनमें सरकार के समर्थन में लोग सड़कों पर उतरे थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की रणनीति का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना और संभावित हमलों को नैतिक रूप से कठिन बनाना है।

हालांकि, आलोचकों का कहना है कि नागरिकों को इस तरह संवेदनशील ठिकानों के पास लाना जोखिम भरा हो सकता है। इससे आम लोगों की सुरक्षा को खतरा बढ़ सकता है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह ‘मानव शृंखला’ रणनीति वास्तव में किसी संभावित हमले को रोकने में कारगर साबित होती है या केवल प्रतीकात्मक विरोध तक सीमित रह जाती है।

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