यूपी: प्रदेश में हलाल लिखे उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध, खाद्य उत्पादों व दवाओं की बिक्री भी हुई प्रतिबंधित

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लखनऊ, यूथ इंडिया। उत्तर प्रदेश में किसी भी उत्पाद पर हलाल प्रमाणन पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। यह पाबंदी खाद्य उत्पाद के साथ ही दवाओं पर भी लागू होगी। ऐसे उत्पाद के निर्माण, भंडारण, वितरण एवं विक्रय पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। इतना जरूर है कि विदेश भेजे जाने वाले उत्पाद के लिए छूट रहेगी। इस संबंध में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की अपर मुख्य सचिव अनीता सिंह ने आदेश जारी कर दिया है। सभी खाद्य एवं औषधि निरीक्षकों को निरंतर निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

लखनऊ के ऐशबाग के रहने वाले शैलेंद्र कुमार शर्मा ने हजरतगंज थाने में गुरुवार (16 नवंबर) को हलाल सर्टिफिकेट के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी।

विदेश में निर्यात होने वाले मांस और उससे निर्मित उत्पादों पर हलाल प्रमाण पत्र जारी होता रहा है। स्थिति यह हुई की धीरे-धीरे तेल, साबुन, घी सहित सभी उत्पादों पर हलाल प्रमाणन की मुहर लगाने लगी। एक तरह से इस प्रमाणन के जरिए उत्पाद को बेचने का हथकंडा अपनाया जाने लगा। मामले की जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम से स्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इसे रोकने की रणनीति बनाई गई। शनिवार को इस पर प्रदेश में पाबंदी लगा दी गई है। प्रदेश में हलाल प्रमाणन वाले किसी भी खाद्य उत्पादों एवं दवाओं को स्वीकार नहीं किया जाएगा। शनिवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। यदि कोई उत्पादन हलाल प्रमाणन वाला पाया गया तो संबंधित निर्माता के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। निर्माण के साथ ही भंडारण, वितरण, विक्रय पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

निर्यात के लिए रहेगी छूट
यदि राज्य में कार्यरत कोई निर्यातक अपने खाद्य उत्पाद अथवा दवा को उन देशों के लिए तैयार करता है, जहां हलाल प्रमाणन युक्त खाद्य उत्पाद ही स्वीकार किए जाते हैं तो उसे छूट दी जाएगी। वह दूसरे देश के लिए तैयार होने वाले उत्पाद का निर्माण, भंडारण एवं वितरण कर सकेगा।

क्या है नियमावली
प्रदेश की नियमावली में हलाल प्रमाणीकरण का कोई नियम नहीं है। सिर्फ गुणवत्ता, पैकिंग, लेबलिंग सही होनी चाहिए। नए आदेश के बाद यदि कोई हलाल प्रमाणीकरण युक्त दवाओं, प्रसाधन सामग्री व खाद्य सामग्री तैयार करता है अथवा भंडारण व वितरण करता है तो उसके खिलाफ अधिनियम 1940 व तत्संबंधी नियमावली के अधीन कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत तीन साल का कारावास, एक लाख रुपये जुर्माना, और नियम 18 ए के तहत छह का कारावास अथवा 25 हजार का जुर्माना हो सकता है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
यदि कोई भी कंपनी उत्तर प्रदेश में हलाल प्रमाण पत्र का प्रदर्शन करते हुए अपने उत्पाद बेचती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस पर प्रदेश में पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की नियमावली में किसी भी उत्पाद पर हलाल प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है।- अनिता सिंह, अपर मुख्य सचिव खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन।

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