लखनऊ| सीमा पार प्रदूषण की बढ़ती समस्या पर चिंता जताते हुए विशेषज्ञ, नीति निर्माता, तकनीकी जानकार और मीडिया प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्र हुए। सभी वक्ताओं ने कहा कि वायु प्रदूषण किसी सीमा में बंधा मुद्दा नहीं, बल्कि यह व्यापक क्षेत्रीय समस्या है, जिसका समाधान केवल मिलकर काम करने से ही संभव है। इसलिए ‘एयरशेड मॉडल’ अपनाना और पड़ोसी देशों के साथ समन्वय बढ़ाना बेहद जरूरी है।
काठमांडू में आयोजित इस दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) द्वारा भारत, नेपाल, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, चीन, म्यांमार और पाकिस्तान के सहयोग से किया गया। सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि वायु गुणवत्ता सुधार के लिए सरकार की ओर से जागरूकता अभियान और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है।
संस्था के महानिदेशक पेमा ग्याम्त्शो ने कहा कि वायु प्रदूषण से निपटने के समाधान उपलब्ध हैं, लेकिन इन पर गंभीरता से अमल करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आदतों में बदलाव, वैज्ञानिक मॉडल और सहयोगी नीतियां ही वास्तविक परिवर्तन ला सकती हैं। उन्होंने बताया कि संस्था भूटान और नेपाल के साथ मिलकर क्लीन एयर एक्शन प्लान तैयार कर रही है, ताकि क्षेत्रीय स्तर पर टिकाऊ प्रयास सुनिश्चित किए जा सकें।





