मुलायम परिवार के बेटे का छलका दर्द
लखनऊ| करीब ढाई दशक पहले शुरू हुई समाजवादी परिवार की चर्चित प्रेम कहानी अब टूटने की कगार पर पहुंच गई है। सपा मुखिया अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव और उनकी पत्नी अपर्णा यादव के बीच तलाक की चर्चाएं उस समय सुर्खियों में आ गईं, जब @iamprateekyadav नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट से अपर्णा से अलग होने का एलान करते हुए आपत्तिजनक भाषा में पोस्ट साझा की गई। देखते ही देखते यह मामला प्रदेश की सबसे बड़ी खबर बन गया और राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बन गया।
प्रतीक यादव और अपर्णा यादव पहले करीब आठ वर्षों तक रिलेशनशिप में रहे और फिर 4 दिसंबर 2011 को इटावा जिले के सैफई स्थित मुलायम सिंह यादव के पैतृक गांव में भव्य समारोह में दोनों का विवाह हुआ था। 14 साल तक पति-पत्नी के रूप में साथ रहने के बाद अब यह रिश्ता टूटने की स्थिति में नजर आ रहा है। इंस्टाग्राम पोस्ट में प्रतीक यादव ने अपर्णा पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें रिश्ते तोड़ने वाली, स्वार्थी और सत्ता के लिए महत्वाकांक्षी बताया। उन्होंने मानसिक प्रताड़ना का आरोप भी लगाया, हालांकि पोस्ट की भाषा को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया।
पोस्ट सामने आने के बाद पहले इसे फर्जी या अकाउंट हैक होने की बात कही गई। अपर्णा यादव के भाई ने भी मीडिया को बताया कि अकाउंट हैक हुआ है और शिकायत दर्ज कराई जा रही है। लेकिन कुछ ही घंटों बाद आई दूसरी पोस्ट में प्रतीक यादव ने बच्चों की कसम खाते हुए अपने आरोप दोहराए और अपर्णा को जिंदगी में देखी गई “सबसे बड़ी झूठी महिला” तक कह दिया। इसके बाद यह मामला और गंभीर हो गया।
इस पूरे घटनाक्रम पर अपर्णा यादव की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। तलाक विवाद के बीच उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से भाजपा संगठन से जुड़ा वीडियो साझा किया गया, जिससे संकेत मिला कि निजी संकट के बावजूद वह राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। गौरतलब है कि अपर्णा यादव वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुई थीं। वह 2017 में सपा के टिकट पर लखनऊ कैंट से चुनाव लड़ चुकी हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं।
बताया जा रहा है कि जिस दिन तलाक से जुड़ी पोस्ट सामने आई, उस समय अपर्णा यादव चेन्नई में थीं, जबकि प्रतीक यादव विदेश में बताए जा रहे हैं। दोनों लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास में रहते थे और दो बच्चों के माता-पिता हैं। राजनीतिक पृष्ठभूमि और पारिवारिक रसूख के चलते यह निजी विवाद अब सार्वजनिक और सियासी बहस में बदल गया है, जिस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।





