मेरठ। सरधना थाना क्षेत्र के गांव कपसाड़ में दलित महिला की हत्या और उसकी नाबालिग बेटी के अपहरण के मामले को लेकर हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। घटना के बाद से गांव में भारी पुलिस बल तैनात है और माहौल बेहद संवेदनशील बना हुआ है। इसी बीच शुक्रवार को सरधना विधायक अतुल प्रधान जब पीड़ित परिवार से मिलने गांव पहुंचे, तो पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें गांव के बाहर ही रोक दिया। विधायक को रोके जाने पर मौके पर हंगामा खड़ा हो गया और पुलिस व समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने तुरंत अतिरिक्त पुलिस बल बुला लिया और क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया। विधायक अतुल प्रधान पुलिस की कार्रवाई से नाराज होकर मौके पर ही धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि एक जनप्रतिनिधि को पीड़ित परिवार से मिलने से रोकना सरकार और प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है। विधायक ने साफ कहा कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती और अपहृत नाबालिग बेटी की सकुशल बरामदगी नहीं हो जाती, तब तक वह पीछे हटने वाले नहीं हैं।
उधर, तनाव की आशंका को देखते हुए पुलिस ने गांव कपसाड़ के चारों ओर से सभी रास्ते सील कर दिए हैं। गांव में भारी संख्या में पुलिस और पीएसी बल तैनात कर दिया गया है। किसी भी बाहरी व्यक्ति की गांव में एंट्री पूरी तरह बंद कर दी गई है। वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद रहकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
पीड़ित परिवार की नाराजगी भी कम होने का नाम नहीं ले रही है। परिजन आरोपियों की गिरफ्तारी और नाबालिग बेटी की सुरक्षित बरामदगी की मांग पर अड़े हुए हैं। उन्होंने महिला का अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया है। प्रशासनिक अधिकारी परिजनों से लगातार बातचीत कर उन्हें समझाने और स्थिति को शांत करने की कोशिश में जुटे हुए हैं, लेकिन फिलहाल परिजन अपनी मांगों पर अडिग बने हुए हैं।
वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी और अपहृत किशोरी की बरामदगी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा। फिलहाल गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था जारी है।






