अनुपम दुबे के कथित मैनेजमेंट की कमान भाई अनुराग दुबे उर्फ डब्बन के हाथ रही
जमीनों पर कब्जो के विरोध करने वालों पर फर्जी मुकदमे और जेल भिजवाने की स्क्रिप्ट गैंग के प्रमुख अवधेश मिश्रा के हाथ रही
उस पर करीब 10 मुकदमे संगीन धारा में दर्ज हैँ
फर्रुखाबाद। जनपद की आपराधिक दुनिया में चर्चित नाम अनुपम दुबे के नेटवर्क को लेकर नए खुलासे सामने आ रहे हैं। उपलब्ध अभिलेखों और पुलिस सूत्रों के अनुसार ब्लॉक प्रमुख अमित दुबे उर्फ ‘बब्बन’ पर 20 मुकदमे, जबकि उनके भाई अनुराग दुबे उर्फ ‘डब्बन’ पर 29 मुकदमे दर्ज बताए जा रहे हैं।
सूत्रों का दावा है कि माफिया अनुपम दुबे के कथित आर्थिक व आपराधिक ‘मैनेजमेंट’ का संचालन लंबे समय तक अनुराग दुबे उर्फ डब्बन के हाथों में रहा। यही कारण है कि डब्बन के खिलाफ मुकदमों की संख्या अधिक बताई जा रही है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि किसी आरोपी पर 15-20 से अधिक मुकदमे दर्ज हों, तो यह संगठित आपराधिक पैटर्न की ओर संकेत करता है। यहां आंकड़े 20 और 29 तक पहुंच रहे हैं, जो सामान्य आपराधिक प्रवृत्ति से कहीं आगे का संकेत देते हैं।
जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि
आर्थिक वसूली और जमीन विवादों का समन्वय डब्बन के स्तर पर होता था।स्थानीय स्तर पर दबाव बनाने और राजनीतिक संपर्कों का इस्तेमालभी ‘डब्बन’ के ही माध्यम से किया जाता था। विवादित जमीनों को हजम करने में फर्जी मुकदमा की स्क्रिप्ट इनके प्रमुख साथी नान- प्रेक्टिसनर वकील अवधेश मिश्रा द्वारा लिखी और संचालित की जाती रही जिससे तमाम भोले वाले लोगों को झूठ मुकदमा और जेल की सलाखों के पीछे भी जाने को मजबूर होना पड़ा। उस पर भी करीब 10 मुकदमे जनपद और गैर जनपद में संगीन धाराओं के दर्ज हैं। एक जमाने में उसे पुलिस का चर्चित दलाल भी कहा जाता था।
संवेदनशील मामलों में मध्यस्थों के जरिए समझौते कराए जाते थे।
यदि ये आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह साफ संकेत है कि नेटवर्क केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि संगठित ढांचे में काम करता रहा।
हाल के महीनों में पुलिस और प्रशासन ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई तेज की है। संपत्ति कुर्की, हिस्ट्रीशीट खोलने और बैंक खातों की जांच जैसी कार्रवाइयां चर्चा में रही हैं।
राजनीतिक गलियारों में भी यह मामला सुर्खियों में है क्योंकि अमित दुबे ‘बब्बन’ एक जनप्रतिनिधि रहा हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या इतने मुकदमों के बावजूद राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा?
आंकड़ों की पड़ताल: क्या कहते हैं रिकार्ड के मुताबिक अमित दुबे ‘बब्बन’ पर 20 मुकदमे, और
अनुराग दुबे ‘डब्बन’ पर 29 मुकदमे
मऊदरवाजा, शहर कोतवाली, कमालगंज, मोहमदाबाद थानो मे दर्ज हैँ।
दर्ज अवधि: पिछले एक दशक से अधिक समय में क्रमिक रूप से
(नोट: मुकदमों की अंतिम स्थिति—जमानत, निरस्तीकरण या सजा—अदालत के निर्णय पर निर्भर है।)
क्या 49 से अधिक कुल मुकदमों का आंकड़ा केवल संयोग है, या यह संगठित आपराधिक तंत्र की कहानी कहता है?
क्या प्रशासनिक सख्ती से यह नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त होगा, या फिर नए नामों के साथ फिर खड़ा हो जाएगा?
फिलहाल फर्रुखाबाद की राजनीति और कानून-व्यवस्था में यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई तय करेगी कि आरोप कितने साबित होते हैं और कानून का शिकंजा कितना कसता।






