– गंभीर आरोप, बोले– आम आदमी का काम नहीं होता बिना ‘सेटिंग’
फर्रुखाबाद। जनपद के एआरटीओ (सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी) कार्यालय को लेकर एक बार फिर भ्रष्टाचार और माफिया राज के गंभीर आरोप सामने आए हैं। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया है कि एआरटीओ कार्यालय में कुख्यात माफिया अनुपम दुबे के गुर्गों का पूरी तरह शिकंजा है और आम जनता का कोई भी काम बिना दलालों और अवैध लेन-देन के नहीं हो रहा।
जिम्मेदारों ने कहा कि एआरटीओ कार्यालय में न तो पारदर्शिता बची है और न ही कानून का भय। कार्यालय परिसर में खुलेआम माफिया के गुर्गे और दलाल घूमते हैं, जो यह तय करते हैं कि किस फाइल को आगे बढ़ाना है और किसे रोकना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि “ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, ट्रांसफर, परमिट जैसे हर काम के लिए रेट तय हैं। बिना पैसे दिए आम आदमी घंटों चक्कर लगाता रहता है।”
काविज का कहना है कि सबसे ज्यादा शोषण गरीब, किसान और छोटे व्यापारियों का हो रहा है। ट्रैक्टर, ऑटो, ई-रिक्शा और दोपहिया वाहन चालकों से जबरन वसूली की जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालय आम जनता की सेवा के लिए होते हैं, लेकिन एआरटीओ कार्यालय माफिया की कमाई का अड्डा बन गया है।
“भ्रष्टाचार पर प्रशासन मौन क्यों?”
सपा नेता ने सवाल उठाया कि—
जब माफिया अनुपम दुबे पर पहले से गंभीर आरोप हैं।जब सरकार जीरो टॉलरेंस की बात करती है।
तो फिर एआरटीओ कार्यालय में उसके गुर्गे खुलेआम कैसे सक्रिय हैं?उन्होंने आरोप लगाया कि या तो प्रशासन दबाव में है या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।
जांच नहीं हुई तो होगा आंदोलन
काविज ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही एआरटीओ कार्यालय में फैले इस माफिया नेटवर्क की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो समाजवादी पार्टी सड़क से सदन तक आंदोलन करेगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि—
एआरटीओ कार्यालय की विजिलेंस जांच कराई जाए,
दलालों और माफिया से जुड़े कर्मचारियों को तत्काल निलंबित किया जाए,
आम जनता को बिना रिश्वत काम कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये।
एआरटीओ कार्यालय को लेकर सामने आए इन आरोपों के बाद आम नागरिकों में भी भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या कदम उठाता है या फिर माफिया राज यूं ही सरकारी दफ्तरों में फलता-फूलता रहेगा।




