बसपा नेता से माफिया बने डॉ. अनुपम दुबे पर नरम पड़ा सरकार का रुख

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पत्नी मीना​क्षी दुबे की सक्रिय राजनीति में एंट्री की चर्चाएँ तेज
अगले विधानसभा चुनाव से पहले दुबे परिवार फिर सुर्खियों में, समर्थकों में जश्न जैसा माहौल

फर्रुखाबाद। कभी सत्ता के ‘चाबुक’ का सामना करने वाले बसपा नेता से माफिया बने डॉ. अनुपम दुबे पर सरकार का रुख हाल के महीनों में नरम पड़ता दिख रहा है। इस बदले राजनीतिक वातावरण के बीच अब उनकी पत्नी मीना​क्षी दुबे के सक्रिय राजनीति में उतरने की चर्चाओं ने जिले के राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय जनमानस तक, अगले विधानसभा चुनाव में मीना​क्षी दुबे के मैदान में उतरने की संभावनाएँ जोर पकड़ चुकी हैं।
डॉ. अनुपम दुबे इस समय मथुरा जेल में हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। इसके बावजूद दुबे परिवार की राजनीतिक पकड़ कम नहीं हुई है। उनके छोटे भाई अमित दुबे बब्बन ब्लॉक प्रमुख मोहम्मदाबाद के रूप में सत्ता का एक अहम केंद्र संभाल चुके हैं, जबकि दूसरे भाई अनुराग दुबे डब्बन दुबे पहले की तरह सार्वजनिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय बने हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, दुबे परिवार की बड़ी बहू मीना​क्षी दुबे पिछले कुछ समय से कई धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही हैं। पूर्व तुलसी जयंती समारोह में उनकी मंच पर वरिष्ठ नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा और भी तेज कर दी है। इस कार्यक्रम के बाद से माना जाने लगा है कि दुबे परिवार पर “सरकारी चाबुक” अब थम चुका है और राजनीतिक पुनर्सक्रियता की राह खुल रही है।
बहुजन समाज पार्टी के स्थानीय समर्थकों के बीच मीना​क्षी दुबे के संभावित राजनीतिक डेब्यू को लेकर उत्साह साफ देखा जा सकता है। कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि वे चुनावी मैदान में उतरती हैं तो दुबे परिवार की परंपरागत पकड़ और सहानुभूति का लाभ उन्हें मिल सकता है।
चुनावी विशेषज्ञ भी मानते हैं कि माफिया छवि वाले नेताओं के परिवार के सदस्य, विशेषकर महिलाएँ, कई बार नए चेहरे के रूप में जनता के बीच कामयाब रणनीतिक विकल्प साबित होती हैं—और मीना​क्षी दुबे के मामले में यह संभावना और मजबूत हो जाती है।
इस सबके बीच एक तथ्य और महत्वपूर्ण है—दुबे परिवार के खिलाफ चल रही कड़ी कार्रवाई अब लगभग ठंडी पड़ चुकी है। इसे राजनीतिक संकेत माना जा रहा है कि भविष्य में परिवार की भूमिका फिर से मजबूत हो सकती है।
स्थानीय राजनीति पर नज़र रखने वाले जानकारों का कहना है कि यदि मीना​क्षी दुबे का नाम औपचारिक रूप से सामने आता है, तो मोहम्मदाबाद और आसपास की सीटों पर समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
फिलहाल तो समर्थकों में खुशी की लहर है और विपक्ष के लिए चिंता की—क्योंकि दुबे परिवार की सक्रिय वापसी का मतलब क्षेत्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत हैं।

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