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Sunday, April 5, 2026

असम में यूसीसी लागू करने का ऐलान, अमित शाह बोले—“बहुविवाह पर लगेगी रोक”

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नई दिल्ली/गुवाहाटी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने असम को लेकर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश देते हुए समान नागरिक संहिता (यूसीसी ) लागू करने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि राज्य में उनकी पार्टी की सरकार बनती है, तो यूसीसी लागू किया जाएगा और किसी को भी चार शादियां करने की अनुमति नहीं होगी।
अपने संबोधन में अमित शाह ने यूसीसी को केवल एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार का महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि एक देश में अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून होना समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। यूसीसी लागू होने से सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक समान कानून लागू होगा, जिससे न्याय व्यवस्था अधिक पारदर्शी और मजबूत बनेगी।
अमित शाह ने विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों पर जोर देते हुए कहा कि बहुविवाह जैसी प्रथाएं महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को समान अधिकार देने और उनके जीवन को सुरक्षित एवं सम्मानजनक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। “यूसीसी महिलाओं को न्याय दिलाने का माध्यम बनेगा,” उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्षों तक पिछली सरकारों ने वोट बैंक की राजनीति के कारण ऐसे संवेदनशील मुद्दों को नजरअंदाज किया। अब समय आ गया है कि देश में एक समान कानून लागू हो, जिससे सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर मिल सकें।
असम को लेकर उन्होंने विश्वास जताया कि जनता विकास और समानता के मुद्दों पर उनकी पार्टी को समर्थन देगी। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में तेजी से काम किया जाएगा।
हालांकि, इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्षी दलों ने यूसीसी को लेकर अलग-अलग राय व्यक्त की है। कुछ दल इसे संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप बताते हैं, तो कुछ इसे विविधता पर असर डालने वाला कदम मानते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूसीसी जैसे मुद्दे का सीधा संबंध न केवल कानून से, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचे से भी है, इसलिए इसे लागू करने से पहले व्यापक संवाद और सहमति आवश्यक होगी।
कुल मिलाकर, अमित शाह का यह बयान आने वाले समय में असम ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति में एक बड़े विमर्श को जन्म दे सकता है। अब देखना यह होगा कि यह मुद्दा चुनावी रणनीति का केंद्र बनता है या वास्तव में किसी ठोस नीति में परिवर्तित होता है।

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