27.4 C
Lucknow
Saturday, March 14, 2026

देशभर में रसोई गैस संकट के बीच बड़ा फैसला, पांच दिन बाद वाणिज्यिक सिलेंडरों की आपूर्ति बहाल

Must read

जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई, कई राज्यों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें, कालाबाजारी रोकने के लिए छापेमारी तेज

नई दिल्ली। देश में रसोई गैस सिलेंडरों की किल्लत के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति पर लगी रोक हटा दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने शनिवार को जानकारी दी कि देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों का वितरण फिर से शुरू कर दिया गया है।

सरकार ने 9 मार्च को बढ़ती मांग और आपूर्ति में असंतुलन को देखते हुए वाणिज्यिक सिलेंडरों की आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी थी। इसके बाद होटल, भोजनालय और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। कई शहरों में होटल संचालकों को लकड़ी के चूल्हों और विद्युत आधारित उपकरणों का सहारा लेना पड़ रहा था।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि घरेलू उपभोक्ताओं को घबराने की आवश्यकता नहीं है और गैस की आपूर्ति को सामान्य करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने गैस उत्पादन बढ़ाने और जमाखोरी रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं।

जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई

गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और अवैध भंडारण की शिकायतों के बाद केंद्र और राज्य सरकारों ने देशभर में छापेमारी तेज कर दी है। तेल विपणन कंपनियों ने भी अपने वितरकों की अचानक जांच शुरू कर दी है।

उत्तर प्रदेश में प्रशासन ने 1400 स्थानों पर अचानक जांच अभियान चलाया। इस दौरान 20 मुकदमे दर्ज किए गए और 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं तेल विपणन कंपनियों ने एक ही दिन में देशभर में लगभग 1300 वितरकों की जांच की।

कर्नाटक में खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग ने कार्रवाई करते हुए 316 घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किए, जिनका उपयोग अवैध रूप से व्यावसायिक कामों में किया जा रहा था। इसके अलावा कोलार जिले में अवैध रूप से गैस भरने वाली एक एजेंसी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।

कई राज्यों में लंबी कतारें, लोग परेशान

गैस की कमी का असर कई राज्यों में साफ दिखाई दे रहा है। गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लगी हुई हैं और कई जगहों पर लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान और पंजाब सहित कई राज्यों में सिलेंडर के लिए लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही है। कई स्थानों पर सिलेंडर को लेकर हंगामे की घटनाएं भी सामने आई हैं।

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में गैस एजेंसी के बाहर सिलेंडर लेने के लिए लाइन में लगे 76 वर्षीय मोहम्मद मुख्तियार की अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पंजाब के बरनाला में भी सिलेंडर के लिए लगी लाइन में खड़े एक बुजुर्ग की हृदयाघात से मौत हो गई। वहीं कन्नौज और कानपुर में गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच विवाद और हंगामे की घटनाएं सामने आई हैं।

होटल और भोजनालयों पर भी असर

वाणिज्यिक सिलेंडरों की आपूर्ति रुकने का असर होटल और भोजनालय कारोबार पर भी पड़ा है। छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग-भिलाई सहित कई शहरों में भोजनालय संचालकों ने खाने के दामों में लगभग 10 प्रतिशत तक वृद्धि कर दी है। कुछ स्थानों पर लकड़ी के चूल्हों पर भोजन तैयार किया जा रहा है और कई जगहों पर भोजन सूची में भी कटौती करनी पड़ी है।

हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों में होटल और ढाबा संचालक गैस के विकल्प के रूप में विद्युत चूल्हों का उपयोग करने लगे हैं, जिससे इन उपकरणों की मांग अचानक कई गुना बढ़ गई है।

कचरे से बने ईंधन के इस्तेमाल की अनुमति

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में उद्योगों, होटलों और भोजनालयों को एक महीने के लिए प्राकृतिक गैस के स्थान पर बायोमास से बने ईंधन के अस्थायी उपयोग की अनुमति दी गई है।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के आदेश के अनुसार कचरे से तैयार किए गए ईंधन का उपयोग किया जाएगा। यह ईंधन नगर निगम और उद्योगों से निकलने वाले सूखे कचरे जैसे प्लास्टिक, कागज, कपड़ा और लकड़ी को संसाधित करके तैयार किया जाता है। इससे कचरे का निपटान भी होता है और ऊर्जा भी प्राप्त होती है।

समुद्री मार्ग से आ रहे गैस जहाज

इस बीच राहत की खबर भी सामने आई है। खाड़ी देशों से गैस लेकर आ रहे दो भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज मार्ग पार कर चुके हैं और अब गुजरात के मुंद्रा तथा कांडला बंदरगाह की ओर बढ़ रहे हैं।

शिपिंग मंत्रालय के अनुसार इन जहाजों में लगभग 92 हजार 700 टन गैस है और इनके 16 या 17 मार्च तक भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना है। माना जा रहा है कि इनके पहुंचने से गैस की किल्लत में कुछ राहत मिल सकती है।

संकट से निपटने के लिए सरकार के पांच बड़े कदम

गैस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन प्रमुख तेल कंपनियों के अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है, जो गैस की आपूर्ति और वितरण की लगातार समीक्षा करेगी।

इसके अलावा जमाखोरी रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया गया है। अब उपभोक्ता एक सिलेंडर की आपूर्ति मिलने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक कर सकेंगे। गैस वितरण के समय पहचान सत्यापन के लिए एक बार उपयोग होने वाला कूट और बायोमेट्रिक व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है।

सरकार ने सभी तेल शोधन संयंत्रों को गैस उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद उत्पादन में लगभग 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

हालांकि इन कदमों के बावजूद कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें अभी भी देखी जा रही हैं और लोगों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो सकेगी।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article