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Friday, January 23, 2026

नेकपुर कला में कथित अवैध प्लाटिंग फिर सक्रिय, कथित भाजपा नेता पवन उर्फ मिरिंडा का आतंक चरम पर

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फर्रुखाबाद: आवास विकास कॉलोनी (Awas Vikas Colony) के निकट नेकपुर कला क्षेत्र में कथित तौर पर चल रही अवैध प्लाटिंग (illegal plotting) को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, चर्चित तेल माफिया बताए जा रहे चंदू बाबू और उनके कथित रिश्तेदार, स्वयं को भाजपा से जुड़ा बताने वाले पवन कटियार उर्फ मिरिंडा से जुड़ी कॉलोनी में खुलेआम प्लॉटिंग का काम जारी है।

सूत्रों का दावा है कि कुछ माह पूर्व नगर मजिस्ट्रेट संजय बंसल द्वारा यहां बुलडोजर कार्रवाई की गई थी, बावजूद इसके कथित अवैध गतिविधियां दोबारा सक्रिय बताई जा रही हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई के बाद भी निर्माण/प्लाटिंग रुकने के संकेत नहीं मिले।

‘प्रशासन पर प्रभाव’ के दावे

स्थानीय स्तर पर यह दावा भी चर्चा में है कि कथित कॉलोनाइजर स्वयं को प्रभावशाली बताते हुए यह कहते फिरते हैं कि “प्रशासन उनके नियंत्रण में है” और उनके विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकती। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। सूत्रों के अनुसार, तहसील सदर क्षेत्र में कुछ सरकारी तालाब/जलाशय से जुड़े राजस्व अभिलेखों में कथित हेरफेर के आरोप भी सामने आ रहे हैं। आरोप है कि नामांतरण/घट-बढ़ जैसे मामलों के बावजूद अब तक निर्णायक कार्रवाई नहीं हो पाई। प्रशासनिक हलकों में यह प्रश्न उठ रहा है कि यदि तालाब/चारागाह जैसी सार्वजनिक संपत्तियों पर अतिक्रमण या पाटने के प्रमाण हैं, तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

राजनीतिक रिश्तों का हवाला

कथित तौर पर स्वयं को पीलीभीत का निवासी बताने और वहां के विधायक/मंत्री से रिश्तेदारी का हवाला देकर निचले स्तर के कर्मचारियों पर दबाव डालने की बातें भी कही जा रही हैं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि ऐसा है, तो यह सेवा नियमों और कानून का उल्लंघन होगा और इसकी जांच आवश्यक है।

प्रशासन से जवाब की अपेक्षा

इस पूरे प्रकरण पर जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की ओर से स्पष्ट स्थिति सामने आना जरूरी माना जा रहा है—
क्या नेकपुर कला में वर्तमान गतिविधियां अवैध हैं? सरकारी तालाब/सार्वजनिक भूमि से जुड़े मामलों में जांच की स्थिति क्या है?स्थानीय नागरिकों की मांग है कि अवैध प्लाटिंग पर बिना भेदभाव सख्त कार्रवाई हो, ताकि सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा और कानून का भरोसा कायम रह सके।

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