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Friday, January 23, 2026

लोनि‍वि में परिवार पेंशन को लेकर गंभीर अनियमितता का आरोप

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-वृद्ध विधवा ने जिलाधिकारी से लगाई न्याय की गुहार
-पेंशन निर्धारण और एरियर भुगतान पर सवाल, छठे–सातवें वेतन आयोग का लाभ नहीं मिलने का आरोप
-लोनि‍वि की सर्विस बुक गुम, आईजीआरएस निस्तारण को बताया भ्रामक
-लिखित आदेश से इनकार, शिकायत वापस लेने का दबाव

फर्रुखाबाद: जनपद फर्रुखाबाद (Farrukhabad) में लोक निर्माण विभाग (लोक निर्माण विभाग) (PWD) से जुड़ा एक परिवार पेंशन का मामला सामने आया है, जिसमें पेंशन निर्धारण, बकाया एरियर भुगतान एवं विभागीय अभिलेख (सर्विस बुक) गुम होने को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। एक वृद्ध विधवा पेंशनभोगी द्वारा इस संबंध में जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की मांग की गई है।

प्रार्थिनी के अनुसार उनके दिवंगत पति लोक निर्माण विभाग में चालक पद पर कार्यरत थे और वर्ष 2001 में सेवानिवृत्त हुए थे। उनके निधन के उपरांत परिवार पेंशन स्वीकृत हुई, लेकिन आज तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि छंठे एवं सांतवे वेतन आयोग के अनुसार पेंशन का सही निर्धारण किस आधार पर किया गया।

प्रार्थिनी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर विभाग ने यह कहते हुए निस्तारण कर दिया कि पेंशन सही है और एरियर दिया जा चुका है, जबकि शिकायतकर्ता को आज तक न तो संशोधित पेंशन निर्धारण पत्रक दिया गयाऔर न ही एरियर की वर्षवार लिखित गणना उपलब्ध कराई गई। पीड़िता का आरोप है कि आईजीआरएस पोर्टल पर किया गया निस्तारण भ्रामक है तथा उनकी मुख्य मांगों को नजरअंदाज कर दिया गया।

आवेदन में यह भी कहा गया है कि विभागीय स्तर पर मौखिक रूप से यह आश्वासन दिया गया कि पेंशन बढ़ जाएगी और एरियर भी मिल जाएगा, साथ ही शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया, लेकिन लिखित आदेश देने से इनकार कर दिया गया। पीड़िता ने जिलाधिकारी से यह भी मांग की है कि सर्विस बुक गुम होने के मामले में उन्हें प्राथमिकी दर्ज कराने की अनुमति प्रदान की जाए, ताकि इस गंभीर लापरवाही की निष्पक्ष जांच हो सके।

मामले को गंभीर बताते हुए पीड़िता ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि सर्विस बुक गुम होने की विधिवत जांच कराई जाए, सही पेंशन निर्धारण एवं बकाया एरियर की लिखित गणना उपलब्ध कराई जाए तथा आईजीआरएस पर किए गए भ्रामक निस्तारण की समीक्षा कर न्यायसंगत निर्णय लिया जाए। यह प्रकरण न केवल एक पेंशनभोगी की वर्षों पुरानी परेशानी को उजागर करता है, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है।

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