प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने यूपी पुलिस और अभियोजन विभाग को बड़ा दिशा-निर्देश देते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में पंजीकृत सभी वकीलों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की विस्तृत जानकारी टेबल फॉर्मेट में जल्द से जल्द कोर्ट में प्रस्तुत की जाए। यह आदेश जस्टिस विनोद दिवाकर ने इटावा के अधिवक्ता मोहम्मद कफील की याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली रिपोर्ट में निम्न विवरण अनिवार्य रूप से शामिल हों—एफआईआर दर्ज होने की तारीख, संबंधित क्राइम नंबर और धाराएं,संबंधित पुलिस थाने का नाम,जांच की वर्तमान स्थिति, और यदि जांच पूरी हो चुकी हो तो उसकी तारीख, चार्जशीट दाखिल करने की तारीख,आरोप तय (चार्ज फ्रेम) किए जाने की तारीख, अब तक दर्ज सरकारी गवाहों की संख्या व ट्रायल की अद्यतन स्थिति का व्योरा दें।
कोर्ट ने कहा कि यदि आवश्यक हो तो यह जानकारी सीलबंद लिफाफे में भी रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से प्रस्तुत की जा सकती है।
हाईकोर्ट ने यूपी डीजीपी के माध्यम से राज्य के सभी कमिश्नर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक तथा संयुक्त निदेशक (प्रॉसिक्यूशन)/विशेष लोक अभियोजकों को निर्देशित किया कि वे यह समस्त जानकारी बार काउंसिल ऑफ़ यूपी को उपलब्ध कराएं। अधिकारियों को यह स्वतंत्रता भी दी गई है कि आवश्यकता पड़ने पर वे अतिरिक्त जानकारी भी प्रदान कर सकते हैं।
जस्टिस दिवाकर ने आदेश में चिंता व्यक्त की कि कई जिलों में गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे वकील बार एसोसिएशन के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे हैं, जिससे न्यायिक प्रणाली के सुचारु संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने कहा—“कानूनी प्रणाली की ताकत सिर्फ कानून या मिसालों से ही नहीं आती, बल्कि जनता के भरोसे से मिलने वाली नैतिक वैधता से आती है। वकील और बार पदाधिकारी कोर्ट के अधिकारी हैं और प्रोफेशनल नैतिकता के संरक्षक भी। उनका आचरण पूरी न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा है।”
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह जानकारी शीघ्र उपलब्ध कराई जाए ताकि कोर्ट मामले की अगली सुनवाई में इसकी समीक्षा कर सके।


