इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म और गर्भपात कराने के आरोपी पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने इस मामले में पीड़िता और राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने पारित किया।
मामला बदायूं निवासी एक युवती की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा है। पीड़िता ने 20 दिसंबर 2025 को महिला थाना बरेली में पुलिस कांस्टेबल अक्षय कुमार और उनके परिजनों के खिलाफ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने, अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने, गर्भपात कराने और अन्य गंभीर आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया था।
आरोपियों की ओर से एफआईआर रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। याची की ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी ने अदालत में दलील दी कि पीड़िता और आरोपी के बीच इंस्टाग्राम के माध्यम से दोस्ती हुई थी और पिछले दो वर्षों से दोनों आपसी सहमति से प्रेम संबंध में थे।
याची पक्ष ने यह भी कहा कि पीड़िता स्वयं आरोपी के साथ सोशल मीडिया पर रील बनाकर अपलोड करती थी और वह नर्सिंग कोर्स की छात्रा है, जिसे अपने निर्णयों की पूरी समझ थी। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि पीड़िता की शादी कहीं और तय हुई थी, जो टूटने के बाद उसने आरोपी पर शादी का दबाव बनाया और पांच लाख रुपये की मांग की। मांग पूरी न होने पर झूठे आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कराई गई।
खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार और पीड़िता से चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।


