लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने एक जनसभा/कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) और प्रदेश सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, वोट कटवाने के आरोप, पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) वोट बैंक और मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत टिप्पणियों के जरिए सियासी माहौल गरमा दिया।
“नकली हस्ताक्षर से वोट कटवाया”
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा की “सीक्रेट बैठक” में यह तय किया गया कि जिन लोकसभा क्षेत्रों में समाजवादी पार्टी जीती है, वहां वोट कटवाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि उनके नगर अध्यक्ष के कथित “नकली हस्ताक्षर” के जरिए उनके ही समर्थक का वोट कटवा दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि इस मामले में चुनाव आयोग ने अब तक क्या कार्रवाई की है।
पीडीए वोट पर “डकैती” का आरोप
सपा अध्यक्ष ने कहा कि एक बूथ के विश्लेषण में 76 प्रतिशत नोटिस PDA वर्ग को दिए गए, जिनमें 46 प्रतिशत यादव और मुस्लिम समुदाय से थे। उन्होंने इसे “डेटा में साफ दिख रही पीडीए वोट की डकैती” बताया। उन्होंने फॉर्म-7 की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब SIR (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो फॉर्म-7 की आवश्यकता क्यों पड़ी। उनके अनुसार, “सामंतवादी लोग पीडीए के वोट बल्क में कटवा रहे हैं।”
मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत और ऐतिहासिक टिप्पणियां
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि वे “स्किल इंडिया” की बात कर रहे हैं, जबकि प्रदेश की वास्तविक स्थिति अलग है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए आरोप लगाया कि भाजपा और उसके समर्थकों ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान “वंदे मातरम्” नहीं गाया। साथ ही यह भी कहा कि भाजपा गठन के समय खुद को समाजवादी बताने के लिए जयप्रकाश नारायण (जेपी) की तस्वीर का उपयोग किया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री पर 2017 से पहले के मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि समाजवादियों ने उन्हें “बचाया” था।
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि शंकराचार्य के साथ दुर्व्यवहार हुआ और कुछ धार्मिक स्थलों एवं मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने दावा किया कि “पूरे देश का पाल समाज और सनातन समाज” मुख्यमंत्री से नाराज है।
बसपा-सपा संबंधों पर टिप्पणी
अखिलेश यादव ने कहा कि बहुजन समाज और समाजवादी पार्टी का “बहुत पुराना और गहरा रिश्ता” रहा है, जो सामाजिक न्याय की राजनीति पर आधारित है।
राजनीतिक तापमान बढ़ा
अखिलेश यादव के इन बयानों से प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। भाजपा की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। चुनावी माहौल के बीच वोटर लिस्ट, फॉर्म-7, पीडीए समीकरण और ऐतिहासिक-धार्मिक मुद्दों पर बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।


