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Sunday, January 11, 2026

चुनाव आयोग पर अखिलेश यादव का हमला- मतदाता आंकड़ों की विसंगति से उठाए गंभीर सवाल

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लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हुए चुनाव आयोग (Election Commission) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग भाजपा के दबाव में काम कर रहा है और वोट लूट के लिए बनाए गए कथित समीकरणों में ऐसी चूक हो गई है, जिससे सच्चाई सामने आ गई है। अखिलेश यादव ने कहा कि मतदाता आंकड़ों में सामने आई भारी विसंगतियाँ लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरे का संकेत हैं।

अखिलेश यादव ने सबसे बड़ा सवाल यह उठाया कि जब केंद्रीय चुनाव आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में मतदाताओं की संख्या अलग-अलग सामने आ रही है, तो आखिर सही आंकड़ा कौन सा माना जाए। उन्होंने कहा कि एक ही प्रदेश, एक ही क्षेत्र और एक ही अधिकारियों द्वारा कराए गए पुनरीक्षण में इतना बड़ा अंतर किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं है।

उन्होंने बताया कि केंद्रीय चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश विधानसभा की मतदाता सूची का एसआईआर कराया, जबकि उसी अवधि में राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनावों की मतदाता सूची का एसआईआर कराया। हैरानी की बात यह है कि दोनों ही पुनरीक्षण एक ही स्थानों पर, एक ही बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा किए गए, फिर भी आंकड़े एक-दूसरे से बिल्कुल उलट निकले।

सपा अध्यक्ष के अनुसार विधानसभा एसआईआर के बाद प्रदेश में मतदाताओं की संख्या 2.89 करोड़ घटकर 12.56 करोड़ रह गई, जबकि पंचायत एसआईआर के बाद ग्रामीण मतदाताओं की संख्या 40 लाख बढ़कर 12.69 करोड़ हो गई। उन्होंने सवाल किया कि दोनों में से कौन सा एसआईआर सही है, क्योंकि दोनों आंकड़े एक साथ सही नहीं हो सकते। अखिलेश यादव ने मांग की कि चुनाव आयोग इस विरोधाभास पर तत्काल स्थिति स्पष्ट करे और जनता को सच्चाई बताए।

अखिलेश यादव ने कहा कि यदि मतदाता सूची जैसी बुनियादी प्रक्रिया में ही पारदर्शिता नहीं है, तो निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला लोकतंत्र के साथ सुनियोजित खिलवाड़ की ओर इशारा करता है और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। इस दौरान सपा प्रमुख ने भारतीय जनता पार्टी सरकार पर बेरोजगारी को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सबसे अधिक सत्य-विरोधी पार्टी है और उसके शासन में बेरोजगारी चरम पर पहुँच चुकी है।

उन्होंने आशा वर्करों को लेकर दिए जा रहे आपत्तिजनक बयानों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इससे आशा बहनों का अपमान हो रहा है और उनमें गहरा आक्रोश है। यह भाजपा सरकार की रोजगार देने में पूरी तरह विफलता को उजागर करता है। अखिलेश यादव ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पर भी सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के जरिए तीखा कटाक्ष किया। केशव मौर्य के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें उन्होंने कहा था कि सपा के विधायक उनके संपर्क में हैं, अखिलेश ने तंज कसते हुए लिखा—

“पहले यह बताएं कि भाजपा खुद उनके संपर्क में है या नहीं। वे पार्टी की मेनलाइन में हैं, साइडलाइन में हैं या पूरी तरह आउट ऑफ लाइन हो चुके हैं?”

अखिलेश यादव का यह हमला केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर सीधा सवाल है। मतदाता सूची में सामने आई विसंगतियाँ यदि समय रहते स्पष्ट नहीं की गईं, तो आने वाले चुनावों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। विपक्ष का कहना है कि अब चुनाव आयोग को चुप्पी तोड़कर जवाब देना ही होगा।

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