लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच X (फॉर्मेरली ट्विटर ) पर एक पोस्ट के माध्यम से सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने समझौता ज्ञापन (एमओयू) और ‘एआई’ को लेकर व्यंग्य करते हुए भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि यदि एमओयू करने से पहले ही “एआई से पूछ” ली जाती, तो कई गलतियों से बचा जा सकता था। उन्होंने ‘एआई’ को “कृत्रिम छवि” बताते हुए कहा कि ले-देकर बनाई गई छवि का असर प्रदेश की वास्तविक छवि पर पड़ रहा है।
उन्होंने ‘फाइव परसेंटिया’ कहे जाने वाले कथित घूसखोर और स्वार्थी लोगों पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे लोग दूसरों की अनभिज्ञता का फायदा उठाकर सिस्टम को कमजोर कर रहे हैं। इनकी वजह से न केवल भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, बल्कि प्रदेश की छवि भी धूमिल हो रही है।
सपा प्रमुख ने कहा कि जब इस प्रकार के भ्रष्टाचार के मामले सामने आते हैं, तो ईमानदार और गंभीर निवेशक हतोत्साहित होते हैं। इससे प्रदेश में निवेश का माहौल प्रभावित होता है और विकास की गति पर भी असर पड़ता है।
उन्होंने अपने बयान के अंत में कहा कि सत्ता में बैठे लोग भले ही एक समय बाद चले जाएं, लेकिन प्रदेश और यहां की जनता को इन फैसलों का प्रभाव लंबे समय तक झेलना पड़ता है। इसलिए कम-से-कम ऐसा एक कार्य अवश्य किया जाए, जिससे प्रदेश की छवि सुधरे और जनता को वास्तविक लाभ मिल सके।
अखिलेश यादव के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भ्रष्टाचार, निवेश और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।
एमओयू और ‘ए आई ’ को लेकर अखिलेश यादव का तंज, भ्रष्टाचार पर उठाए सवाल


