लखनऊ/नई दिल्ली।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल ही में हुए युवा कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर स्पष्ट और संतुलित प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और आंदोलन का अधिकार सभी को है, लेकिन ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जिससे विदेशी प्रतिनिधियों के सामने देश की छवि धूमिल हो।
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार की नीतियों से असहमति होना अलग विषय है, परंतु प्रदर्शन के तरीके ऐसे होने चाहिए जो देश की गरिमा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को प्रभावित न करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी भी प्रकार के हंगामे या अव्यवस्था के पक्षधर नहीं हैं।
सपा प्रमुख ने कहा कि विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाए, लेकिन यह संघर्ष देश की साख को नुकसान पहुंचाने वाला नहीं होना चाहिए। विदेशी डेलीगेट्स की मौजूदगी में हुए घटनाक्रम पर उन्होंने कहा कि “हम अपनी बात देश के भीतर मजबूती से रखें, लेकिन दुनिया के सामने देश का अपमान न हो, इसका ध्यान रखना जरूरी है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह बयान विपक्षी राजनीति में संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर वे लोकतांत्रिक अधिकारों का समर्थन कर रहे हैं, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय छवि को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। जहां एक ओर सत्तापक्ष इसे विपक्ष की स्वीकारोक्ति के रूप में देख रहा है, वहीं विपक्षी खेमे में इसे जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है।
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि लोकतांत्रिक विरोध की सीमा क्या हो और राष्ट्रीय प्रतिष्ठा की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।






