नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अमेरिका के साथ हुए कथित व्यापारिक समझौते को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने इस समझौते को ‘डील’ मानने से इनकार करते हुए इसे सीधे तौर पर ‘ढीलापन’ करार दिया और आरोप लगाया कि सरकार ने इस सौदे के जरिए भारत का पूरा बाजार अमेरिका के हवाले कर दिया है। अखिलेश यादव ने कहा कि ऐसे फैसले देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता, धार्मिक परंपराओं और राष्ट्रीय हितों पर गंभीर असर डाल सकते हैं।
अखिलेश यादव ने विशेष रूप से अमेरिका से डेयरी उत्पादों के संभावित आयात पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत में डेयरी उत्पाद केवल खानपान का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि उनका सीधा संबंध सनातन धर्म की परंपराओं, पूजा-पाठ और व्रत-उपवास से जुड़ा हुआ है। यादव ने सवाल उठाया कि यदि दूध, घी और अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स विदेशों से आयात किए जाएंगे, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि वे भारतीय धार्मिक मान्यताओं और व्रतों की शुद्धता के मानकों पर कैसे खरे उतरेंगे। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को मानने वालों को यह सोचना होगा कि ऐसे में उनके व्रत और धार्मिक आस्थाएं किस तरह सुरक्षित रहेंगी।
इसके साथ ही अखिलेश यादव ने चीन के साथ भारत के संबंधों और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार संवेदनशील मुद्दों पर खुली चर्चा से बचती रही है। यादव का कहना था कि जब विपक्ष ने चीन के साथ सीमा विवाद, जमीन की स्थिति और सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाए, तो सरकार ने स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन के मामले में किसी भी तरह का समझौता या निर्णय बेहद सोच-समझकर होना चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर देश की सीमा सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा हुआ है।
अखिलेश यादव ने यह भी दावा किया कि मौजूदा हालात में भारत न केवल चीन के सामने अपनी जमीन खो रहा है, बल्कि वैश्विक समझौतों के जरिए अपना घरेलू बाजार भी कमजोर कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि सीमा पर वास्तविक स्थिति क्या है और सेना का रुख क्या है। यादव ने सवालिया लहजे में कहा कि अगर भारत जमीन भी खो रहा है और बाजार भी, तो यह साफ करना होगा कि देश आखिर किस दिशा में जा रहा है।






