कहा सच्चाई का ट्रांसफर नहीं हो सकता, सुप्रीम कोर्ट–हाईकोर्ट लेंगे संज्ञान
लखनऊ।
संभल में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के तबादले को लेकर सियासत तेज हो गई है। इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में मीडिया से बातचीत करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। अखिलेश यादव ने कहा कि “सच्चाई का ट्रांसफर नहीं किया जा सकता” और यह मामला आगे चलकर सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट के संज्ञान में आएगा।
अखिलेश यादव ने कहा कि संभल में सीजेएम का ट्रांसफर केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं माना जा सकता। इसके पीछे कई सवाल खड़े होते हैं, जिनका जवाब सरकार को देना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कोई अधिकारी या न्यायिक पद पर बैठा व्यक्ति सच्चाई और निष्पक्षता के साथ काम करता है, तो उसे दबाव में लाने के लिए तबादले जैसे कदम उठाए जाते हैं।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। यदि न्यायिक अधिकारियों के फैसलों या कार्यशैली से असहमत होकर उनका ट्रांसफर किया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरे की घंटी है। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार चाहे जितना दबाव बनाए, लेकिन सच को दबाया नहीं जा सकता।
अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था में सत्ता के दबाव में फैसले लेने की कोशिशें की जा रही हैं। लेकिन देश की संवैधानिक संस्थाएं इतनी कमजोर नहीं हैं कि वे इस तरह के मामलों को नजरअंदाज कर दें।
उच्च न्यायालयों पर भरोसा
सपा अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि इस पूरे मामले पर उच्च न्यायालय स्वतः संज्ञान लेंगे और जो भी सच है, वह सामने आएगा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हर स्तर पर न्याय और संविधान की रक्षा के लिए खड़ी रहेगी।
संभल में सीजेएम के ट्रांसफर को लेकर यह बयान आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।





