एसआईआर को बताया एनआरसी, केंद्रीय एजेंसियों पर लगाए गंभीर आरोप
ममता बनर्जी की खुलकर की सराहना
कोलकाता। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कोलकाता दौरे के दौरान केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने एसआईआर, केंद्रीय जांच एजेंसियों और पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर ऐसे बयान दिए, जिनसे राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। अखिलेश यादव के बयान विपक्षी दलों की साझा चिंता और भाजपा के खिलाफ बढ़ती मुखरता को दर्शाते हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया दरअसल एनआरसी का ही एक रूप थी, क्योंकि इसके तहत बड़ी संख्या में लोगों को अपनी नागरिकता साबित करनी पड़ी। उन्होंने इसे आम जनता के लिए मानसिक और प्रशासनिक उत्पीड़न करार दिया।
उन्होंने कहा—“एसआईआर ही एनआरसी था, क्योंकि कई लोगों को नागरिकता साबित करनी पड़ी। मैं बधाई देना चाहता हूं दीदी को, जिन्होंने डिजिटल डकैती को बचा लिया।”
उनका आरोप था कि डिजिटल प्रक्रियाओं के नाम पर लोगों के अधिकारों में कटौती की कोशिश हुई, जिसे पश्चिम बंगाल सरकार ने रोकने का काम किया।
सीबीआई और आयकर विभाग को लेकर भी तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा—“ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स भाजपा का संगठन है। जहां भाजपा को लगता है कि इनको आगे करके लड़ा जा सकता है, वहां इन्हें आगे कर देते हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि इन एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को डराने, दबाने और बदनाम करने के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक प्रवृत्ति है और इससे संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा
“भारतीय जनता पार्टी से कोई मुकाबला कर रहा है, तो यहां की मुख्यमंत्री आदरणीय ममता बनर्जी जी कर रही हैं।”
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने न सिर्फ बंगाल में भाजपा को रोका है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी विपक्ष को एकजुट करने का साहस दिखाया है।
अखिलेश यादव के इन बयानों को केवल व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं, बल्कि विपक्षी एकजुटता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उनका मानना है कि यदि लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों की रक्षा करनी है, तो विपक्ष को साझा मंच पर आकर संघर्ष करना होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कोलकाता में दिए गए अखिलेश यादव के बयान आने वाले समय में
नागरिकता और जांच एजेंसियों के मुद्दे को फिर से राष्ट्रीय विमर्श में लाएंगे,और विपक्षी दलों के बीच समन्वय की संभावनाओं को मजबूत करेंगे।





