टाटा समूह के सहयोग से छात्रों को मिलेगा आधुनिक तकनीकों का उन्नत प्रशिक्षण
लखनऊ
तकनीकी शिक्षा को आधुनिक और रोजगारपरक बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। आईटीआई और पॉलीटेक्निक संस्थानों के बाद अब प्रदेश के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों को भी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इसके तहत छात्रों को भौतिक (प्रैक्टिकल) प्रशिक्षण देने के लिए उच्च स्तरीय मशीनों और तकनीकों से युक्त लैब स्थापित की जाएंगी। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए प्राविधिक शिक्षा विभाग ने देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक समूह टाटा ग्रुप के साथ साझेदारी की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे प्रदेश के तकनीकी शिक्षा ढांचे में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।
इस योजना के अंतर्गत इंजीनियरिंग कॉलेजों में स्थापित होने वाली हाईटेक लैब में छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग सिमुलेशन और ऑटोमेशन जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे छात्रों को सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि उद्योगों में काम आने वाली व्यावहारिक दक्षता भी हासिल होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में कंपनियां ऐसे युवाओं को प्राथमिकता देती हैं, जिनके पास तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ प्रैक्टिकल स्किल भी हो, और यह पहल उसी दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगी।
योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कॉलेजों के शिक्षकों को भी इन नई तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे वे बदलते तकनीकी परिवेश के अनुरूप छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन दे सकेंगे। वर्तमान में कई राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, विशेषकर नवस्थापित संस्थान, आधुनिक लैब और संसाधनों के अभाव में पीछे चल रहे हैं, जिसके कारण छात्रों का रुझान निजी संस्थानों की ओर बढ़ रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों का विश्वास भी बढ़ेगा।
इसके समानांतर डॉ . ए .पी .जे . अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी द्वारा भी तकनीकी शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस टेक्नोलॉजी, साइबर फोरेंसिक, सेमीकंडक्टर और एप्पल तकनीक जैसे क्षेत्रों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों का लाभ विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्थानों के साथ-साथ राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों को भी मिलेगा, जिससे उन्हें नई तकनीकों की गहराई से समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा।
प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है। उन्होंने बताया कि टाटा समूह के सहयोग से बनने वाली ये लैब न केवल तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाएंगी, बल्कि छात्रों को रोजगार और स्वरोजगार दोनों के बेहतर अवसर उपलब्ध कराएंगी।
विशेषज्ञों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि यह पहल आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को तकनीकी शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में एक नई पहचान दिला सकती है। इससे प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा और युवा नई तकनीकों के जरिए नवाचार की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे। कुल मिलाकर, यह योजना प्रदेश के लाखों तकनीकी छात्रों के भविष्य को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।


