नई दिल्ली। राजधानी में आयोजित दिल्ली एआई समिट के दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने एक कमर्शियल (व्यावसायिक रूप से उपलब्ध) रोबोट को अपना स्वदेशी विकसित प्रोजेक्ट बताकर प्रदर्शित किया।
क्या है आरोप?
समिट में प्रदर्शित किए गए रोबोट को विश्वविद्यालय की इन-हाउस रिसर्च और इनोवेशन का परिणाम बताया गया। हालांकि तकनीकी समुदाय के कुछ सदस्यों ने दावा किया कि यह रोबोट अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहले से उपलब्ध एक कमर्शियल मॉडल है, जिसे केवल री-ब्रांडिंग या मामूली कस्टमाइजेशन के साथ पेश किया गया।
सोशल मीडिया पर कार्यक्रम के वीडियो और तस्वीरें वायरल होने के बाद यह विवाद और गहरा गया। कई विशेषज्ञों ने सवाल उठाया कि यदि रोबोट खरीदा गया प्रोडक्ट है तो उसे विश्वविद्यालय का मौलिक आविष्कार बताना भ्रामक हो सकता है।
इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है। सूत्रों का कहना है कि यदि रोबोट को शैक्षणिक डेमो या रिसर्च उपयोग के रूप में प्रदर्शित किया गया था, तो उसे “स्व-विकसित” बताने के दावे की स्पष्टता आवश्यक है।
तकनीकी पारदर्शिता पर सवाल
एआई और रोबोटिक्स जैसे संवेदनशील और उभरते क्षेत्रों में पारदर्शिता और मौलिकता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों को अपने नवाचारों के दावों में स्पष्टता रखनी चाहिए, ताकि छात्रों और निवेशकों का भरोसा बना रहे।
फिलहाल यह मामला तकनीकी जगत और शैक्षणिक समुदाय में चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित मंचों पर जवाबदेही तय हो सकती है।


