आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे मुआवजा घोटाले की जांच तेज, कई अधिकारियों पर गिर सकती है गाज; जिलाधिकारी को दो सप्ताह में पूरी रिपोर्ट देने का आदेश

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लखनऊ| आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान हुए कथित मुआवजा घोटाले ने एक बार फिर प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। किसानों को दी गई मुआवजा राशि में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद शासन ने पूरे मामले की गहराई से जांच कराने का फैसला लिया है। इसी के तहत जिले के जिलाधिकारी को विस्तृत जांच सौंपी गई है, जिसके बाद से संबंधित विभागों में अफरातफरी का माहौल है। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद कई अधिकारी और कर्मचारी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।

शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान भूमि का मूल्यांकन गलत तरीके से बढ़ाया गया, कुछ किसानों को वास्तविक क्षेत्रफल से अधिक मुआवजा दिलाया गया, और कई मामलों में ऐसे लोगों को भी भुगतान हुआ जिन्हें पात्र नहीं माना जाना चाहिए था। शासन को प्राप्त प्राथमिक रिपोर्टों में संकेत मिले कि ये अनियमितताएँ सुनियोजित तरीके से की गई थीं, जिसके बाद पूरे प्रकरण ने गंभीर रूप ले लिया।

शासन ने जिलाधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया है कि मुआवजे से जुड़े सभी मामलों की बिंदुवार जांच कर दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इसके साथ ही आदेश दिया गया है कि जिन अधिकारियों, कर्मचारियों या लाभार्थियों को गलत तरीके से भुगतान किया गया है, उनसे पूरी राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए। प्रारंभिक अनुमान है कि घोटाले की राशि करोड़ों में हो सकती है।

यह भी उल्लेखनीय है कि आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर तत्कालीन मुख्य सचिव ने 13 मई 2013 को लखनऊ, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, कन्नौज, कानपुर नगर, उन्नाव और हरदोई के जिलाधिकारियों को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के लिए शीघ्र भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इस दौरान भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया बड़े पैमाने पर चली और इसी अवधि में कई गड़बड़ियों के बीज बोए जाने की आशंका जताई जा रही है।

जांच शुरू होने के बाद से ही कई अधिकारी और कर्मचारी सतर्क हो गए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और पुराने फाइलों को निकालकर जांच टीम के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों पर कठोर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे प्रकरण ने प्रदेश में चल रही अन्य बड़ी परियोजनाओं की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। शासन ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए पारदर्शिता बढ़ाने, डिजिटल सर्वेक्षण और भू-लेख प्रणाली को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

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