अलीगढ़: उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी जमीन पर अवैध संपत्तियों और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। संभल (Sambhal) के बाद, अब अलीगढ़ (Aligarh) में जिला प्रशासन और अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) द्वारा एक बड़ी संयुक्त कार्रवाई की गई है। बुधवार को, गोविला गैस एजेंसी के पास एक गली में स्थित सरकारी जमीन पर अवैध रूप से निर्मित कब्रिस्तान को बुलडोजर (bulldozers) की मदद से ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई किशनपुर में हुई, जहां गाटा नंबर-22 के रूप में दर्ज अत्यंत मूल्यवान सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया गया था।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, यह जमीन अलीगढ़ विकास प्राधिकरण की एक आवासीय परियोजना के लिए आरक्षित थी। हालांकि, 2013 में समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान, इस जमीन को फर्जी तरीके से कब्रिस्तान घोषित कर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि विधायक/एमएलसी विकास निधि से कथित तौर पर इस जमीन पर चारदीवारी और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण में धन का इस्तेमाल किया गया था।
बुधवार को चलाए गए विध्वंस अभियान के बाद प्रशासन ने लगभग 12 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन वापस ले ली है। यह मामला वर्षों से सरकारी फाइलों में दबा पड़ा था, लेकिन हाल ही में जागरूक नागरिकों ने सीधे सरकार से शिकायत की। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने आयुक्त की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया। जांच में यह “स्पष्ट रूप से स्थापित” हुआ कि जमीन विकास प्राधिकरण की है और उस पर किया गया सारा निर्माण पूरी तरह से अवैध था।
एडीए की टीमें बुधवार सुबह जब बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचीं, तो किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। एडीए सचिव दीपाली भार्गवा के नेतृत्व में अवैध चारदीवारी और स्थायी ढांचों को ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के बाद, एडीए सचिव ने कहा कि शेष पुनः प्राप्त भूमि का विधिवत सीमांकन किया जाएगा और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। पूरी कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट सरकार को भेजी जा रही है। जांच में इस बात पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है कि सरकारी भूमि पर विधायक निधि का दुरुपयोग कैसे हुआ। इस कथित धोखाधड़ी में शामिल अधिकारियों और प्रभावशाली व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संभावना है।


