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Monday, April 13, 2026

पेट्रोल डीजल के बाद अब ऊर्जा संकट से जूझ रहा पाकिस्तान

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– बाजार और मॉल के समय में कटौती, रात 8 बजे तक ही खुलेंगी दुकानें
इस्लामाबाद
ईंधन संकट के बढ़ते दबाव के बीच पाकिस्तान सरकार ने ऊर्जा बचत के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब देश के कई हिस्सों में बाजार और शॉपिंग मॉल को जल्दी बंद करना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे ईंधन खपत को नियंत्रित किया जा सके।

यह निर्णय प्रधानमंत्री शेहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। सरकार का मानना है कि इस कदम से ऊर्जा संकट के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।

नई व्यवस्था के तहत पंजाब, बलूचिस्तान, इस्लामाबाद और पाकिस्तान-नियंत्रित कश्मीर में सभी बाजार और मॉल मंगलवार से रात 8 बजे तक ही खुले रहेंगे। यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

वहीं, खैबर पख्तूनख्वा में कुछ राहत दी गई है। यहां के प्रमुख शहरों में बाजारों को रात 9 बजे तक खोलने की अनुमति दी गई है, ताकि स्थानीय व्यापार पर अत्यधिक असर न पड़े।

सिंध में फिलहाल अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने कहा है कि बाजारों के समय निर्धारण से पहले व्यापारिक संगठनों से परामर्श किया जाएगा।

सरकार ने केवल बाजारों तक ही नहीं, बल्कि अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर भी समय सीमा तय की है। बेकरी, रेस्टोरेंट और अन्य खाने-पीने की दुकानों को रात 10 बजे तक बंद करना अनिवार्य किया गया है।

इसके अलावा, शादी समारोहों पर भी असर पड़ा है। सभी शादी हॉल और मैरिज गार्डन को भी रात 10 बजे तक बंद करने का निर्देश दिया गया है, जिससे बिजली और ईंधन की खपत को सीमित किया जा सके।

हालांकि, जरूरी सेवाओं को इस नियम से बाहर रखा गया है। मेडिकल स्टोर और फार्मेसियों को समय की पाबंदी से छूट दी गई है, ताकि आम लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं में कोई परेशानी न हो।

सरकार का मुख्य उद्देश्य देश में बढ़ते ईंधन संकट से निपटना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना है। ऊर्जा आयात पर बढ़ते खर्च ने अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती खड़ी कर दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से अल्पकालिक राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन दीर्घकाल में ऊर्जा उत्पादन और वैकल्पिक स्रोतों पर ध्यान देना जरूरी होगा।

व्यापारिक संगठनों ने इस फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ ने इसे आवश्यक कदम बताया है, जबकि अन्य का कहना है कि इससे कारोबार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह नीति कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या इससे पाकिस्तान के ऊर्जा संकट को नियंत्रित करने में वास्तविक मदद मिलती है।

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