मैनपुरी : इस वर्ष माहे रमजान में एक विशेष धार्मिक संयोग बनता दिखाई दे रहा है। इस बार करीब 26 वर्ष बाद ऐसा अवसर आ सकता है जब रमजान के महीने में पांच जुमा पड़ने की संभावना है। इस स्थिति में रमजान के अंतिम दिनों में दो जुमा की नमाज को अलविदा जुमा के रूप में अदा किया जा सकता है। इससे पहले वर्ष 1999 और 2000 के आसपास भी ऐसा संयोग देखने को मिला था, जब रमजान के दौरान पांच जुमा पड़े थे और मुसलमानों ने दो अलविदा जुमा की नमाज अदा की थी।
भोगांव जामा मस्जिद के इमाम मौलाना खालिद रजा नूरी ने बताया कि चांद की स्थिति और इस बार के कैलेंडर के अनुसार रमजान का महीना ऐसा बन रहा है जिसमें पांच जुमे आने की संभावना है। इस कारण रमजान के अंतिम चरण में लगातार दो जुमा पड़ सकते हैं, जिन्हें अलविदा जुमा के रूप में अदा किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस तरह का संयोग बहुत कम देखने को मिलता है, इसलिए इस बार रमजान का महीना इबादत के लिहाज से और भी खास माना जा रहा है।
मौलाना खालिद रजा नूरी के अनुसार चांद के दीदार के आधार पर इस वर्ष ईद-उल-फितर 19 या 20 मार्च को मनाए जाने की संभावना है। उन्होंने बताया कि रमजान का महीना 29 या 30 दिनों का होता है और यदि 30 दिन पूरे होते हैं तो इस बार रमजान में पांच जुमा पड़ सकते हैं। इसी वजह से आखिरी दो जुमा को अलविदा जुमा के रूप में अदा करने का अवसर मिल सकता है।
उन्होंने बताया कि अलविदा जुमा रमजान के आखिरी जुमा को कहा जाता है, जो मुस्लिम समुदाय के लिए बेहद अहम माना जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में लोग मस्जिदों में पहुंचकर विशेष नमाज अदा करते हैं और अल्लाह से दुआएं मांगते हैं। यदि इस बार दो अलविदा जुमा का संयोग बनता है तो यह रोजेदारों के लिए एक खास आध्यात्मिक अवसर होगा।
इमाम मौलाना खालिद रजा नूरी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि रमजान का महीना रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना होता है। इस दौरान सभी रोजेदारों को अधिक से अधिक नमाज अदा करनी चाहिए, रोजा रखना चाहिए और कुरआन की तिलावत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पाक महीने में जरूरतमंदों की मदद करना, जकात और सदका देना तथा आपसी भाईचारे और शांति को बढ़ावा देना भी बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा कि अंतिम रूप से रमजान और जुमा की तारीखें चांद के दीदार के बाद ही तय होंगी, लेकिन मौजूदा स्थिति के अनुसार इस बार रमजान में पांच जुमा पड़ने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो यह करीब ढाई दशक बाद बनने वाला एक दुर्लभ धार्मिक संयोग होगा, जिसे लेकर मुस्लिम समुदाय में उत्साह और उत्सुकता देखी जा रही है।
करीब 26 साल बाद रमजान में बन रहा खास संयोग, इस बार दो अलविदा जुमा की नमाज होने की संभावना


