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Monday, February 16, 2026

केजीएमयू में स्थापित होगी उन्नत फेफड़ा प्रत्यारोपण यूनिट, गंभीर रोगियों को प्रदेश में ही मिलेगा विश्वस्तरीय उपचार

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लखनऊ: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में जल्द ही उन्नत फेफड़ा प्रत्यारोपण यूनिट की स्थापना की जाएगी। यह जानकारी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने एडवांस्ड इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी सम्मेलन के दौरान दी। उन्होंने कहा कि इस नई सुविधा के शुरू होने से गंभीर फेफड़ों की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को अब प्रदेश से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उन्हें विश्वस्तरीय उपचार लखनऊ में ही उपलब्ध कराया जाएगा।

यह सम्मेलन पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग, इंडियन चेस्ट सोसाइटी और पल्मोक्रिट फाउंडेशन के तत्वावधान में शताब्दी अस्पताल फेज-दो परिसर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देशभर से आए विशेषज्ञों ने फेफड़ों की जटिल बीमारियों, कैंसर और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की।

कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान तेजी से सबस्पेशियलिटी सेवाओं की ओर अग्रसर हो रहा है। फेफड़ा प्रत्यारोपण जैसी अत्याधुनिक सुविधा की स्थापना से न केवल प्रदेश के मरीजों को राहत मिलेगी, बल्कि केजीएमयू राष्ट्रीय स्तर पर सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सेवाओं का सशक्त केंद्र बनेगा। उन्होंने कैंसर के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शरीर की कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि से ट्यूमर बनता है, इसलिए समय पर जांच और उपचार अत्यंत आवश्यक है।

सम्मेलन में प्रो. रवि कांत ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में सबस्पेशियलिटी सेवाओं के विकास से रोगी-केंद्रित और सटीक उपचार संभव हो रहा है। आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित विशेषज्ञों के सहयोग से जटिल रोगों का सफल उपचार अब पहले की तुलना में अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

वहीं, प्रख्यात विशेषज्ञ प्रो. डी. बेहेरा ने बताया कि पिछले दो दशकों में भारत में इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि केजीएमयू का पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग इस क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है और नई तकनीकों को अपनाने में निरंतर आगे है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उन्नत फेफड़ा प्रत्यारोपण यूनिट की स्थापना से प्रदेश के हजारों गंभीर मरीजों को जीवनदान मिल सकेगा। यह पहल न केवल चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान भी

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