मुंबई| महाराष्ट्र सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और संवेदनशील बनाने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए अधिकारियों को विधायकों और सांसदों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है। नए निर्देशों के अनुसार, किसी भी विधायक या सांसद के दफ्तर में आते ही अधिकारी अपनी कुर्सी से खड़े होकर उनका स्वागत करेंगे, उनकी बात पूरी गंभीरता और ध्यान से सुनेंगे तथा विनम्रता का परिचय देते हुए संवाद करेंगे। सरकार का कहना है कि हाल के महीनों में कई बार ऐसी शिकायतें सामने आईं कि जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा, जिससे जनता से जुड़े कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही थी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में जारी इस आदेश का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को उनके संवैधानिक दायित्वों के अनुरूप सम्मान देना और शासन-प्रशासन के बीच तालमेल को मजबूत करना है।
सरकार ने साफ कर दिया है कि जिन अधिकारियों द्वारा इन नए निर्देशों का पालन नहीं किया जाएगा, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सभी विभागाध्यक्षों को आदेश की प्रति जारी करते हुए सुनिश्चित करने को कहा गया है कि यह नियम जमीनी स्तर पर बिना किसी ढिलाई के लागू हो। इस फैसले पर प्रशासनिक हलकों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ अधिकारियों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को सम्मान देना हमेशा उनकी जिम्मेदारी रही है, लेकिन इसे अनिवार्य बनाने से नौकरशाही पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। वहीं कई अधिकारियों ने इसे सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि इससे जनता से जुड़े मुद्दों के समाधान में तेजी आएगी।
विपक्षी दलों ने इस आदेश पर सरकार को घेरा है। विपक्ष का कहना है कि सम्मान किसी आदेश से नहीं, बल्कि व्यवहार और कार्यशैली से मिलता है। कुछ नेताओं ने इसे अधिकारियों पर अनावश्यक दबाव डालने वाला निर्णय बताया। हालांकि सरकार का कहना है कि यह कदम सुशासन और प्रशासनिक अनुशासन को मजबूत करने के लिए आवश्यक है, और इससे जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जनता की समस्याओं के समाधान में अधिक पारदर्शिता और तेजी आएगी। राज्य सरकार आने वाले दिनों में सभी जिलों में इस आदेश के अनुपालन की समीक्षा करेगी ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।





