संत समाज की मौजूदगी में अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने किया औपचारिक एलान
कल्कि धाम स्थापना दिवस समारोह बना ऐतिहासिक क्षण का साक्षी
संभल (उत्तर प्रदेश)। संभल स्थित कल्कि धाम में आयोजित स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान आचार्य प्रमोद कृष्णम को ‘जगद्गुरु’ की उपाधि से सम्मानित करने की घोषणा की गई। यह घोषणा संत समाज की उपस्थिति में की गई, जिससे समारोह का महत्व और बढ़ गया।
कार्यक्रम में उपस्थित रविंद्र पुरी , जो अखिल भारतीय अखाडा परिषद के अध्यक्ष हैं, ने संतों की सभा के समक्ष औपचारिक रूप से आचार्य प्रमोद कृष्णम को ‘जगद्गुरु’ घोषित किया।
घोषणा के समय मंच पर अनेक प्रमुख संत-महात्मा और धार्मिक नेता मौजूद रहे।
स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और संत समाज के प्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल हुए।
घोषणा के बाद मंच से आचार्य प्रमोद कृष्णम के आध्यात्मिक योगदान, सामाजिक कार्यों और धार्मिक जागरूकता अभियानों का उल्लेख किया गया।
हिंदू परंपरा में ‘जगद्गुरु’ उपाधि अत्यंत सम्मानजनक मानी जाती है। यह उपाधि किसी संत या आचार्य के व्यापक आध्यात्मिक प्रभाव और नेतृत्व को दर्शाती है।
हालांकि विभिन्न परंपराओं और संप्रदायों में इस उपाधि की मान्यता और प्रक्रिया अलग-अलग हो सकती है।
घोषणा के बाद समर्थकों में उत्साह का माहौल देखा गया। कार्यक्रम स्थल पर जयकारों और अभिनंदन के स्वर गूंज उठे। कई संतों ने इसे धार्मिक एकता और सनातन परंपरा के सुदृढ़ीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
धार्मिक और सामाजिक स्तर पर इस घोषणा के दूरगामी प्रभाव देखे जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आचार्य प्रमोद कृष्णम की भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रमुख हो सकती है।
संभल के कल्कि धाम में हुआ यह एलान धार्मिक जगत की एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में देखा जा रहा है। संत समाज की उपस्थिति में ‘जगद्गुरु’ की घोषणा ने समारोह को ऐतिहासिक स्वरूप दे दिया।
आचार्य प्रमोद कृष्णम को ‘जगद्गुरु’ घोषित किया गया


