लखनऊ। प्रदेश में ओवरब्रिजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। चार दिन के भीतर दूसरी बार ओवरब्रिज की रेलिंग टूटने की घटना सामने आई है। रविवार सुबह रायबरेली के भदोखर थाना क्षेत्र के भांव गांव के पास लखनऊ–प्रयागराज हाईवे पर एक तेज रफ्तार टैंकर अनियंत्रित होकर ओवरब्रिज की रेलिंग तोड़ता हुआ हवा में लटक गया। गनीमत रही कि वाहन नीचे नहीं गिरा, जिससे बड़ा हादसा टल गया। घटनास्थल पर अफरातफरी मच गई और देखते ही देखते स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई।
बताया गया कि टैंकर ऊंचाहार से रायबरेली की ओर जा रहा था और उसे कुंदनगंज स्थित सीमेंट फैक्ट्री पहुंचना था। टैंकर में सीमेंट की राख भरी थी। राह में अचानक वाहन का नियंत्रण बिगड़ गया और वह सीधे रेलिंग तोड़ते हुए ब्रिज के किनारे अटक गया। दुर्घटना के बाद पुलिस व राहत दल ने पहुंचकर वाहन को हटवाने की कार्रवाई शुरू कराई।
इससे पहले 26 नवंबर को बाराबंकी में रेलवे ओवरब्रिज पर बड़ा हादसा हुआ था। मोरंग लदा एक ट्रक पुल की रेलिंग तोड़कर रेलवे ट्रैक पर गिर गया था, जिससे सात घंटे तक रेलवे यातायात बाधित रहा। उसी दौरान बगल के ट्रैक से गुजर रही गरीब रथ एक्सप्रेस भी तेज झटकों से हिल गई थी। उस समय ट्रेन में करीब 1600 यात्री सवार थे, जो पूरी रात दहशत में रहे।
इन दो घटनाओं ने ओवरब्रिजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सड़क की तुलना में ओवरब्रिजों को संकरा बनाया जा रहा है? क्या सुरक्षा मानकों का पालन सिर्फ कागजों में सीमित रह गया है? स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलों की रेलिंग बेहद कमजोर साबित हो रही है और भारी वाहनों के दबाव में तुरंत टूट जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते पुलों की मजबूती और सुरक्षा उपायों की समीक्षा नहीं की गई, तो भविष्य में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं।



