लखनऊ| गो माता को राज्य माता घोषित करने और देश से बीफ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर धर्माचार्य वर्ग ने अब खुला मोर्चा खोल दिया है। श्रीविद्या मठ, केदारघाट में आयोजित पत्रकार वार्ता में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 12 मार्च को लखनऊ में ‘गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध’ का शंखनाद किया जाएगा। उन्होंने दो टूक कहा कि 30 दिन की चेतावनी पहले ही पूरी हो चुकी है और यदि शेष 10 दिनों में सरकार ने मांगों पर निर्णय नहीं लिया तो उसके परिणामों की जिम्मेदारी स्वयं सरकार की होगी।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह आंदोलन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की रक्षा का संकल्प है। उन्होंने आरोप लगाया कि गो संरक्षण के नाम पर केवल घोषणाएं हो रही हैं, जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही।
आंदोलन की रूपरेखा भी विस्तार से घोषित की गई। छह मार्च को शंकराचार्य घाट पर वीर शिवाजी महाराज जयंती के अवसर पर गंगा पूजन कर संकल्प लिया जाएगा। इसके बाद सात मार्च को श्रीविद्या मठ से प्रस्थान कर संकटमोचन मंदिर में प्रार्थना की जाएगी और वहीं से यात्रा की औपचारिक शुरुआत होगी।
यात्रा जौनपुर, सुलतानपुर और रायबरेली में सभाओं के माध्यम से जनसमर्थन जुटाएगी। आठ मार्च को मोहनलालगंज, लालगंज, अचलगंज और उन्नाव में जनसभाएं होंगी। नौ मार्च को उन्नाव, बांगरमऊ, बघौली और नैमिषारण्य में कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। दस मार्च को सिधौली और इटौंजा होते हुए यात्रा लखनऊ पहुंचेगी।
ग्यारह मार्च को शीतलाअष्टमी के अवसर पर कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल, आशियाना में विद्वत सभा आयोजित की जाएगी, जहां देशभर से संत-महात्मा और धर्माचार्य जुटेंगे।
स्वामी ने कहा कि 12 मार्च को राजधानी लखनऊ में ‘धर्म युद्ध’ का शंखनाद केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सरकार को चेताने का अंतिम प्रयास होगा। उन्होंने समर्थकों से बड़ी संख्या में पहुंचने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि सरकार ने समय रहते निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का ऐलान: 12 मार्च को लखनऊ में ‘गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध’, सरकार को 10 दिन की अंतिम चेतावनी


