फर्रुखाबाद| आलू किसानों की हालत इस समय बेहद चिंताजनक बनी हुई है। बाजार में आलू के दाम इस कदर गिर चुके हैं कि किसानों की महीनों की मेहनत लागत भी नहीं निकाल पा रही है। ऐसा ही एक मार्मिक मामला कमालगंज क्षेत्र के अहमदपुर देवरिया गांव से सामने आया है, जहां एक किसान की तीन महीने की कड़ी मेहनत का हिसाब जब जुड़ा, तो हाथ में सिर्फ 175 रुपये ही बचे।
अहमदपुर देवरिया निवासी कुलदीप कुमार उर्फ भीमा पुत्र राजकुमार ने बताया कि उन्होंने गांव के ही लालाराम कटियार के खेत में चौथे हिस्से पर आलू की खेती की थी। कुल तीन बीघा जमीन में आलू बोया गया, जिसमें से 73 पैकेट आलू की पैदावार हुई। बाजार में आलू का भाव मात्र 325 रुपये प्रति पैकेट मिला, जिससे कुल बिक्री 23,725 रुपये की हुई। इसमें से 1,825 रुपये बारदाने में ही खर्च हो गए और शेष 21,900 रुपये बचे।
चौथे हिस्से के हिसाब से कुलदीप कुमार को 5,475 रुपये मिले, लेकिन यहीं से असली सच्चाई सामने आई। उन्होंने बताया कि खुदाई में 3,450 रुपये खर्च हुए, आलू बुवाई में 1,200 रुपये लगे, घास-बाली की दवा में 200 रुपये गए और कटाई के 450 रुपये देने पड़े। इन सभी खर्चों को घटाने के बाद उनके हाथ में सिर्फ 175 रुपये ही बचे।कुलदीप ने भावुक होते हुए कहा कि आलू की फसल के लिए उन्होंने तीन महीने तक दिन रात मेहनत की। डाड़े काटे, दवाइयां डालीं, पानी लगाया, खाद डाली और हर दिन खेत की सेवा की, लेकिन तीन महीने की इस मेहनत का फल उन्हें सिर्फ 175 रुपये के रूप में मिला। उन्होंने कहा कि इस हालत में किसान परिवार का गुजारा कैसे होगा, यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है।यह मामला न सिर्फ एक किसान की पीड़ा को दर्शाता है, बल्कि आलू की खेती से जुड़े सैकड़ों किसानों की हकीकत को भी उजागर करता है। गिरते दाम और बढ़ती लागत ने किसानों को कर्ज और हताशा के दलदल में धकेल दिया है। किसान अब सरकार और प्रशासन से न्यूनतम समर्थन मूल्य और उचित बाजार व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, ताकि उनकी मेहनत यूं ही मिट्टी में न मिले।

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