फर्रुखाबाद। आलू की कीमतों में भारी गिरावट से जिले के किसान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। किसान यूनियन के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष एवं करणी सेना के जिलाध्यक्ष ठाकुर मोहन सिंह ने कहा कि मौजूदा समय में किसान “मद्दे की मार” झेल रहा है और आलू भूसे से भी सस्ता बिक रहा है।
मोहन सिंह ने बताया कि वर्तमान में आलू का भाव लगभग 200 रुपये प्रति पैकेट चल रहा है, जबकि आलू की लागत करीब 12 हजार रुपये प्रति बीघा तक पहुंच चुकी है। ऐसे में किसान को अपनी फसल से लागत भी नहीं निकल पा रही है।
ब्लैक में खाद खरीदने को मजबूर किसान
उन्होंने कहा कि आलू की बुआई के समय किसानों को डीएपी और यूरिया खाद ब्लैक में खरीदनी पड़ी, जिससे लागत और बढ़ गई। आज हालात यह हैं कि मेहनत के बावजूद किसान घाटे में जा रहा है।
किसान नेता ने केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार से मांग की कि आलू का 700 रुपये प्रति पैकेट समर्थन मूल्य तुरंत घोषित किया जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसान कमजोर हुआ, तो इसका असर पूरे देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
चिप फैक्ट्री लगाने की भी मांग
मोहन सिंह ने कहा कि फर्रुखाबाद जिले की सातनपुर मंडी एशिया की सबसे बड़ी आलू मंडी मानी जाती है और जिले में आलू का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में जिले की चारों विधानसभाओं में एक-एक आलू चिप्स फैक्ट्री स्थापित की जानी चाहिए, ताकि आलू की खपत बढ़े और किसानों को स्थायी बाजार मिल सके।
आलू किसानों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो किसान आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। फिलहाल जिले के किसान सरकार की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।

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