किसानों ने खेतों में खड़ी फसल जुतवानी शुरू की

फर्रुखाबाद| कमालगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत दरौरा पेरी में आलू की कीमतों में आई भारी गिरावट ने किसानों की कमर तोड़ दी है। बाजार में आलू के बेहद कम दाम मिलने के कारण किसान अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रहे हैं। मजबूरी में किसानों को खड़ी फसल नष्ट करने जैसा कठोर फैसला लेना पड़ रहा है।
इसी क्रम में ग्राम दरौरा पेरी के किसान दुर्विजय सिंह ने अपने करीब 2 से 3 बीघा खेत में खड़ी आलू की फसल पर रोडा रोलर (वेटर) चलवाकर उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया। किसान का कहना है कि मौजूदा हालात में फसल बेचने से नुकसान और बढ़ रहा है, इसलिए फसल नष्ट कर अगली फसल की तैयारी करना ही बेहतर विकल्प बचा है।
किसान दुर्विजय सिंह ने बताया कि इस समय आलू मात्र 100 रुपये प्रति पैकेट के आसपास बिक रहा है, जबकि एक बीघा आलू की खेती में बीज, खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी समेत 10 से 15 हजार रुपये तक की लागत आती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान कीमतों पर आलू बेचने से प्रति बीघा केवल करीब 5 हजार रुपये ही निकल पा रहे हैं, जिससे सीधा-सीधा भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, फसल खुदवाने और मंडी तक पहुंचाने का खर्च भी नहीं निकल पा रहा है।
एक अन्य किसान भूरेलाल ने बताया कि यदि आलू की यही स्थिति बनी रही तो वह अपने 10 से 12 बीघा खेत में खड़ी आलू की फसल भी जुतवा देंगे। उनका कहना है कि फसल बेचने से बेहतर है खेत को खाली कर अगली फसल की तैयारी की जाए, ताकि और अधिक नुकसान से बचा जा सके।
ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या किसी एक किसान तक सीमित नहीं है। ग्राम पंचायत दरौरा पेरी में अब तक लगभग 15 से 20 बीघा क्षेत्र में खड़ी आलू की फसल जुतवाई जा चुकी है। किसानों का कहना है कि इस वर्ष आलू का उत्पादन अधिक हुआ है, लेकिन उचित समर्थन मूल्य और बाजार व्यवस्था न होने के कारण उन्हें अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल पा रहा है।
किसानों ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि आलू के दाम स्थिर करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, खरीद केंद्र खोले जाएं या न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था की जाए, ताकि अन्नदाता को अपनी फसल यूं सड़कों और खेतों में नष्ट करने के लिए मजबूर न होना पड़े।

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