फर्रुखाबाद। एशिया की सर्वाधिक राजस्व देने वाली प्रसिद्ध आलू मंडी सातनपुर में इन दिनों आलू की आवक चरम पर पहुंच गई है। मंडी में आलू की भरमार के चलते मेला जैसा माहौल बना हुआ है। भले ही आलू के दाम किसानों की उम्मीदों के अनुरूप नहीं हैं, इसके बावजूद बड़ी संख्या में किसान आलू की खुदाई कर मंडी पहुंच रहे हैं।

आज सातनपुर आलू मंडी में लगभग 100 मोटर आलू की आमद दर्ज की गई। मंडी में आलू के भाव मामूली परिवर्तन के साथ 431 रुपये प्रति कुंतल से लेकर 661 रुपये प्रति कुंतल तक रहे। दामों में किसी बड़े उछाल के संकेत नहीं मिलने से किसान वर्ग मायूस नजर आया।

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी आलू की खुदाई शुरू होते ही दामों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इससे किसानों की चिंताएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने से पहले उन्होंने आलू से कई सपने संजोए थे, लेकिन मंडी में मंदी की स्थिति देखकर वे सपने धूमिल होते नजर आ रहे हैं।

कुछ किसानों ने बताया कि आलू के कमजोर दामों के चलते अब शादी-विवाह, मकान निर्माण और अन्य घरेलू कार्यों को टालना पड़ सकता है। लागत के मुकाबले उचित मूल्य न मिलने से किसान आर्थिक दबाव में आ गए हैं। मंडी में सोमवार को कहीं 90 तो कहीं 100 मोटर तक आलू की आमद बताई गई, जिससे यह साफ है कि आपूर्ति अधिक होने के कारण दामों पर दबाव बना हुआ है।

आलू उत्पादक किसानों का कहना है कि उन्हें मजबूरी में आलू बाजार में भेजना पड़ रहा है। यदि आलू की खुदाई और बिक्री में देरी की गई तो अगली फसलों पर असर पड़ेगा। किसानों के अनुसार गेहूं की बुवाई और दोबारा आलू की फसल तैयार करने के लिए खेत खाली करना जरूरी है, इसलिए चाहे दाम अपेक्षा से काफी कम ही क्यों न हों, आलू निकालकर बेचना उनकी मजबूरी बन गई है।

किसानों का यह भी कहना है कि वर्तमान भाव न तो लागत निकालने लायक हैं और न ही मुनाफा देने वाले। इसके बावजूद वे उम्मीद लगाए बैठे हैं कि आने वाले दिनों में बाजार में कुछ सुधार होगा। फिलहाल सातनपुर मंडी में आलू की आवक लगातार बनी हुई है और भावों में केवल मामूली उतार-चढ़ाव ही देखने को मिल रहा है।

मंडी से जुड़े व्यापारियों का मानना है कि आवक कम होने पर ही भावों में सुधार संभव है, लेकिन जिस तरह से किसान बड़ी संख्या में आलू लेकर मंडी पहुंच रहे हैं, उससे फिलहाल दाम बढ़ने की संभावना कम दिखाई दे रही है। कुल मिलाकर सातनपुर आलू मंडी में इन दिनों चहल-पहल तो है, लेकिन किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here