बहराइच| तराई क्षेत्र के नेपाल सीमा से सटे जिलों में आदमखोर वन्यजीवों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। भेड़ियों और तेंदुओं के हमलों से सहमे ग्रामीण अब बाघ की मौजूदगी से और अधिक भयभीत हैं। हालात ऐसे हैं कि कई गांवों में लोग घरों से बाहर निकलने से कतराने लगे हैं। जंगल से सटे इलाकों में लगातार हो रहे हमलों के चलते सबसे ज्यादा बच्चे और महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
बलरामपुर जिले के पचपेड़वा क्षेत्र में भारत–नेपाल सीमा से सटे गांवों में जंगली जानवर के हमले में दो महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई। भांभर रेंज के नेपाल सीमावर्ती बिशनपुर कोडर गांव की रहने वाली 25 वर्षीय कमला घर से कुछ ही दूरी पर गई थीं, तभी उन पर आदमखोर ने हमला कर दिया। दूसरी घटना नेपाल सीमा से लगे परसरामपुर गांव के बेलभरिया बीट के पास हुई, जहां 28 वर्षीय उर्मिला कोरी को जंगली जानवर ने अपना शिकार बना लिया। उर्मिला मूल रूप से नेपाल के कपिलवस्तु जिले के अमौली गांव की निवासी थीं और पचपेड़वा में अपने रिश्तेदार के घर जा रही थीं।
इन घटनाओं को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि हमला बाघ ने किया है, जबकि वन विभाग तेंदुए के हमले की बात कह रहा है। एसडीओ मनोज कुमार के अनुसार घटनास्थल की स्थिति का निरीक्षण किया गया है और बाघ के हमले की पुष्टि नहीं हुई है। विभागीय रिपोर्ट में दोनों घटनाओं को तेंदुए का हमला बताया गया है। साथ ही ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है।
वन क्षेत्राधिकारी योगेश कुमार ने लोगों को अकेले जंगल की ओर न जाने और समूह में चलने की सलाह दी है। महिलाओं से अपील की गई है कि वे जंगल में अकेले लकड़ी बीनने न जाएं। जंगली जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों से निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है।
पचपेड़वा क्षेत्र में इससे पहले भी बाघ के हमले में एक किसान की जान जा चुकी है, जिससे ग्रामीणों के मन में बाघ की मौजूदगी को लेकर भय और गहरा गया है।
बहराइच जिले में भी आदमखोर वन्यजीवों का आतंक बना हुआ है। नवाबगंज इलाके के चनैनी गांव में बाघ की मौजूदगी से अफरा-तफरी मच गई। शौच के लिए गई महिलाओं ने बाघ को देखा तो शोर मचाया। महिलाओं को बचाने पहुंचे ग्रामीणों पर बाघ ने झपट्टा मार दिया, जिसमें 50 वर्षीय रामधीरज यादव और 35 वर्षीय नागे कश्यप गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डीएफओ राम सिंह यादव के अनुसार हमलावर वन्यजीव की तलाश के लिए वन विभाग की टीमें क्षेत्र में कॉबिंग कर रही हैं और घेराबंदी कर सघन निगरानी रखी जा रही है।
उधर, कतर्नियाघाट जंगल से सटे घाघरा नदी के कछार में बसे धरमपुर रेतिया और संपतपुरवा गांवों में भेड़ियों की दहशत बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि भेड़िये लगातार नदी किनारे दिखाई दे रहे हैं और सुबह-शाम शिकार की तलाश में आबादी में घुस आते हैं। संपतपुरवा निवासी कैलाश की पत्नी जब दूध लेने धरमपुर रेतिया जा रही थीं, तभी एक भेड़िये ने उन्हें दौड़ा लिया। किसी तरह लोगों की मदद से उनकी जान बच सकी।
लगातार हो रही इन घटनाओं से पूरे तराई क्षेत्र में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की है, ताकि आदमखोर वन्यजीवों के आतंक से निजात मिल सके और भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।






