मैनपुरी
बिछवां क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम देवगंज में एक चौंकाने वाली लेकिन प्रेरणादायक घटना सामने आई है। यहां खेत में कड़ी धूप के बीच गेहूं की फसल काट रही एक साधारण महिला के बैंक खाते में अचानक 9.99 करोड़ रुपये जमा होने का मैसेज आया। जैसे ही महिला ने मोबाइल पर यह संदेश देखा, वह स्तब्ध रह गई और कुछ देर तक समझ ही नहीं पाई कि आखिर यह कैसे संभव हो सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव देवगंज निवासी पारसभान बहेलिया की पत्नी रीता देवी गुरुवार दोपहर अपने परिवार के सदस्यों के साथ खेत में काम कर रही थीं। इसी दौरान करीब एक बजे उनके मोबाइल पर बैंक से एक एसएमएस अलर्ट आया। जब उन्होंने मैसेज खोला तो उसमें खाते में 9 करोड़ 99 लाख 49 हजार 588 रुपये जमा होने की सूचना दी गई थी। इतनी बड़ी धनराशि का नाम सुनते ही उनके हाथ-पांव फूल गए और वह हैरानी में पड़ गईं।
पहले तो उन्हें लगा कि यह कोई तकनीकी गलती या मजाक हो सकता है, लेकिन जब बार-बार मैसेज को पढ़ने के बाद भी वही जानकारी दिखाई दी, तो उन्होंने अपने बेटे को बुलाया और दोनों तुरंत स्थिति की सच्चाई जानने के लिए करीमगंज स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा पहुंच गए। वहां लगे एटीएम मशीन से उन्होंने अपने खाते का बैलेंस चेक किया, जहां स्क्रीन पर इतनी बड़ी रकम देखकर मां-बेटे दोनों के चेहरे पर आश्चर्य और अविश्वास साफ झलक रहा था।
हालांकि, इस अप्रत्याशित घटना के बावजूद रीता देवी ने लालच में आकर कोई गलत कदम नहीं उठाया। उन्होंने तुरंत बैंक शाखा के अधिकारियों से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी और साफ शब्दों में कहा कि यह धनराशि उनकी नहीं है, इसलिए वह इसे निकालना नहीं चाहतीं। उनकी इस ईमानदारी भरे कदम ने न केवल बैंक कर्मचारियों को प्रभावित किया, बल्कि पूरे क्षेत्र में उनकी चर्चा होने लगी।
बैंक शाखा प्रबंधक ऋषिकांत पांडेय ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि किसी अन्य खाताधारक की ओर से तकनीकी त्रुटि या मानवीय भूल के कारण यह भारी रकम गलती से रीता देवी के खाते में ट्रांसफर हो गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि बैंक खुलने के बाद विस्तृत जांच कर धनराशि को संबंधित वास्तविक खाते में वापस भेज दिया जाएगा।
इस घटना के बाद गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में रीता देवी की ईमानदारी की सराहना की जा रही है। लोग इसे एक मिसाल के रूप में देख रहे हैं कि आज के समय में भी सच्चाई और नैतिकता जिंदा है। जहां एक ओर लोग छोटी-छोटी रकम के लिए भी विवाद करते हैं, वहीं इतनी बड़ी राशि मिलने के बावजूद उसे लौटाने का निर्णय लेना वास्तव में सराहनीय है।
यह घटना न केवल बैंकिंग व्यवस्था की सतर्कता की ओर इशारा करती है, बल्कि समाज में ईमानदारी और नैतिक मूल्यों की महत्ता को भी उजागर करती है। रीता देवी का यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है, जो यह सिखाता है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, सच्चाई का रास्ता ही सबसे बेहतर होता है।


