20 C
Lucknow
Sunday, February 8, 2026

देश के त्वरित विकास को समर्पित कल्याणकारी केन्‍द्रीय बजट

Must read

(डॉ. महेन्द्र सिंह-विनायक फीचर्स)

केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए संसद में पेश किया गया गया बजट देश के त्वरित विकास को समर्पित कल्याणकारी बजट है। इस बजट में समाहित प्रस्तावों में आर्थिक विकास (economic development) की गति को बढ़ाने और उसे निरन्तर बनाये रखने पर जोर दिया गया है। साथ ही, लोककल्याण के लिए बजट प्रस्तावों पर भी पर्याप्त बल दिया गया है। वित्तमंत्री ने अपने बजट भाषण में तीन कर्तव्यों को उजागर किया। ये हैं (ⅰ) अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों के प्रति लचीलेपन में वृद्धि करते हुए आर्थिक विकास को गति प्रदान करना और उसे बनाये रखना (ii) जन आकाँक्षाओं की पूर्ति और उनकी क्षमताओं का वर्द्धन करना एवं (iii) देश के प्रत्येक परिवार, समुदाय, क्षेत्र और वर्ग तक संसाधनों, सुविधाओं तथा अवसरों की पहुंच को सुनिश्चित करना।

इस तरह ये कर्तव्य मोदी सरकार की सर्वसमावेशी एवं पोषणीय विकास की रणनीति को सुस्पष्ट रूप में परिभाषित करते हैं। ज्ञातव्य है कि मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के केन्द्र में एक ओर आर्थिक संवृद्धि की गति को तेज करना रहा है वहीं दूसरी तरफ सापेक्षतया वंचित लोगों एवं क्षेत्रों को उन‌की क्षमता व सामर्थ्य को बढ़ाते हुए उन्हें विकास की मुख्यधारा में शामिल करना रहा है। इस दृष्टि से यह कहना समीचीन है कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास एवं सबका प्रयास’ का ध्येय वाक्य लोकनीतियों के प्रतिपादन एवं कार्यान्वयन का नाभिकेन्द्र रहा है। इसमें आर्थिक समृद्धि एवं लोककल्याण में वृद्धि स्वतः विहित रहे हैं।

मोदी सरकार द्वारा संरचनात्मक आर्थिक सुधारों का मूल विचार ‘रिफार्म, परफार्म व ट्रॉन्सफार्म’ रहा है। इस बजट में भी, बजट प्रावधानों को अधिक परिणामोन्मुखी बनाने के लिए सुधारों के क्रम को जारी रखा गया है। ‘विकसित भारत’ के महालक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इस बजट में कृषि व ग्रामीण अर्थव्यवस्था, मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र, एमएसएमई, ओडीओपी, रिन्यूबल व न्यूक्लियर एनर्जी, सेमिकंडक्टर, आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्स, जलमार्ग व रेल विकास, डिकार्बनाइजेशन, निर्यात संवर्द्धन, रक्षा क्षेत्र इत्यादि संभावनापूर्ण क्षेत्रों एवं तत्सम्बन्धी क्रियाओं के संवर्द्धन व विकास के लिए वित्तमंत्री द्वारा प्राथमिकता के आधार पर अपेक्षित आवंटन किए गये हैं। साथ ही, मानव पूँजी के निर्माण से सम्बन्धित क्षेत्रों यथा शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला, युवा और दिव्यांग सशक्तिकरण पर पर्याप्त बल दिया गया है। वस्तुतः, मानव पूँजी के बेहतर विकास से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी तथा जनकल्याण में वृद्धि होगी।

वित्तमंत्री ने इस बजट में राजकोषीय सुदृढ़ीकरण को जारी रखते हुए इस पर विशेष बल दिया है। हाल के वर्षों में जीडीपी के सापेक्ष राजकोषीय घाटा में निरन्तर गिरावट से इस बात की पुष्टि होती है कि मोदी सरकार का राजकोषीय प्रबन्धन सम्बन्धी निष्पादन श्लाधनीय रहा है। वर्ष 2021-22 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 6.7 प्रतिशत; 2022-24 में 6.5 प्रतिशत 2023-24 में 5.5 प्रतिशत; 2024-25 में 4.8 प्रतिशत एवं 2025-26 में 4.4 प्रतिशत था। इसे 2026-27 के बजट में कम करके 4.3 प्रतिशत पर रख गया है। ये प्रवृत्तियाँ राजकोषीय व्यवस्था की मजबूती की परिचायक हैं।

मोदी सरकार की राजकोषीय प्रवीणता एवं बेहतर वित्तीय प्रबंधन का ही परिणाम है कि जीडीपी के सापेक्ष राजकोषीय घाटा निरन्तर घटा है। साथ ही, वित्तमंत्री इस बात में भी सफल रही हैं कि उन्होंने इस बजट में जीडीपी के सापेक्ष केन्द्र सरकार के ऋण को 55.6 प्रतिशत पर रखा है। यह वर्ष 2025-26 के लिए 56.1 प्रतिशत रखा गया था। साथ ही, इस बजट में जीडीपी के सापेक्ष राजस्व घाटा एवं प्राथमिक घाटा में भी कमी आई है। घटते घाटे एवं ऋण से निजी पूँजी निवेश में वृद्धि होगी।

इस बजट में, राजस्व में सतत वृद्धि,पूँजीगत व्यय में वृद्धि और राजकोषीय पारदर्शिता में सुधार के संकेतकों से भी देश की राजकोषीय सुदृढ़ता की पुष्टि होती है। पूँजीगत खर्च के जरिये अवस्थापना क्षेत्र के विकास ने विकास को तेज करने और रोजगार को बढ़ाने में उल्लेखनीय तौर पर योगदान दिया है। इंफ्रास्ट्रक्चर आर्थिक विकास में धमनियों का कार्य करता है। इसलिए यह कहने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए कि इन्फ्रास्ट्रक्चर पर मोदी सरकार द्वारा किया गया निवेश लगातार विकास का इंजन बना हुआ है। एक ओर जहाँ केन्द्र सरकार स्वयं पूंजीगत व्यय को बढ़ा रही है; वहीं दूसरी ओर राज्य सरकारों को भी अनुदान व ऋण देकर उनके पूँजीगत खर्च को बढ़ाने में मदद कर रही है।

वर्ष 2025-26 की तुलना में 2026-27 के बजट में पूँजीगत आवंटन में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यदि राज्यों को दी जाने वाली अनुदान राशि को भी जोड़ लिया जाय तब प्रभावी पूँजीगत व्यय की वृद्धि 22 प्रतिशत बैठती है। इस तरह मोदी सरकार की यह विचारणा सुस्पष्ट होती है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर की मजबूती आर्थिक उन्नति का मूलाधार है। इस बजट में कुछ विशिष्ट क्षेत्रों क्षेत्रों में पूँजीगत व्यय की वृद्धि दरें इस तरह हैं: टेलीकॉम 97 प्रतिशत,रक्षा 18 प्रतिशत, रेलवे 10 प्रतिशत, सड़क व हाईवे 8 प्रतिशत एवं आवास व नगरीय विकास 6 प्रतिशत। यह तथ्य यह भी दर्शाते हैं कि बेहतर राजकोषीय प्रबन्धन से अब विकासगामी क्रियाओं के लिए अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो रहे हैं।

जीडीपी के सापेक्ष सरकारी ऋण भार को घटाकर 2030-31 तक 50 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा गया है। स्पष्ट है कि इससे आगामी वर्षों में अवस्थापना के विकास के लिए और अधिक ‘फिस्कल स्पेस’ मिल सकेगा। उल्लेखनीय है कि पूँजीगत व्यय में मोदी सरकार द्वारा की गई वृद्धि से आय में तो कई गुना वृद्धि होती ही है, इससे रोजगार में भी उल्लेखनीय तौर पर वृद्धि होती है। इस बजट में छोटे, मझोले एवं धार्मिक नगरों के विकास के लिए भी प्रावधान किए गये हैं। नगरीय क्षेत्रों में जन सुविधाओं के बेहतर विकास से जनजीवन सुगम व स्वस्थ होगा।

साथ ही, इसके विकास से कारोबार सुगम होगा, इसमें वृद्धि होगी। धार्मिक व साँस्कृतिक स्थलों के उन्नयन से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा देश-विदेश से पर्यटकों की आवाजाही से आर्थिकी सशक्त होगी। इस बजट में हास्पिटेलिटी तथा हेल्थ टूरिज्म से भी लोगों की आजीविका के स्रोतों में वृद्धि, रेल एवं जलमार्गों के विकास एवं अपग्रेडेशन से लाजिस्टिक्स की लागतें घटेंगी। इससे व्यापार में वृद्धि तो होगी ही, साथ ही आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी और अर्थव्यवस्था की स्पर्धात्मकता में वृद्धि से निर्यात-प्रेरित निवेश होगा।

इस बात का उल्लेख करना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि इस बजट में अवस्थापना क्षेत्र के विकास के लिए 12.20 लाख करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं। यह एक बड़ी धन‌राशि है। इससे विकास की गति को तेज करने तथा रोजगार को बढ़ाने में महती सहायता मिलेगी। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के अन्तर्गत इस बजट में 40 हजार करोड़ रुपये रखे गये हैं। इसके अतिरिक्त जिन 7 रोजगारपरक क्षेत्रों को समावेशित किया गया है वे हैं: बायो फार्मा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रानिक्स कंपोनेन्टस, रेयर अर्थ, रसायन, पूँजीगत वस्तएँ और टेक्सटाइल्स।

इनसे मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की संवृद्धि बढ़ेगी। वस्तुत: ये अर्थव्यवस्था के उदीयमान क्षेत्र हैं और इनमें उत्पादन, रोज‌गार व निर्यात की प्रचुर संभावनाएं हैं। इसके अलावा बजट में लघु एवं मध्यम उद्योगों को चैंपियन बनाने के निर्णय से भी इस क्षेत्र का विकास तेज होगा। आत्मनिर्भरता एवं स्वदेशी के लक्ष्यों को प्राप्त करने में एमएसएमई, ओडीओपी तथा खादी क्षेत्र की भूमिका महती स्थान रखती है। रक्षा व्यय में वृद्धि,विशेष तौर पर पूँजीगत व्यय में वृद्धि से भी रक्षा मामले में हमारी आत्म-निर्भरता बढ़ेगी और रक्षा सामग्री का निर्यात बढ़ेगा।

कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए इस बजट में जो प्रावधान किये गये हैं उनसे कृषि एवं गैर-कृषि क्रियाओं के पारस्परिक आर्थिक सम्बन्धों को ताकत मिलेगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रयोग से कृषि उत्पादकता बढ़ेगी। कृषि के वाणिज्यीकरण को बढ़ावा मिलेगा। किसानों की आय में वृद्धि होगी। किसानों, युवाओं एवं महिलाओं को उद्यमी बनाने का परिणाम होगा कि स्थानीय स्तर पर आजीविका के स्रोतों का विस्तार होगा। इससे गाँवों से नगरों को होने वाला पलायन भी रुकेगा। पशु चिकित्सा के लिए बजट में की गयी व्यवस्था से पशुधन में संवर्द्धन होगा। इससे गो आधारित प्राकृतिक कृषि के विस्तार में भी सहायता मिलेगी। इस बजट को यदि समग्र रूप से देखें तो यही निष्कर्ष निकलता है कि यह बजट भारत की घरेलू क्षमता का समुचित उपयोग करते हुए त्वरित आर्थिक विकास एवं लोककल्याण में वृद्धि को समर्पित है।

(विनायक फीचर्स)

(भाजपा मध्यप्रदेश के प्रदेश प्रभारी व उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य एवं पूर्व मंत्री है।)

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article