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Sunday, March 29, 2026

पाम संडे पर सीएनआई चर्च में उमड़ा आस्था का सैलाब, खजूर की डालियों संग निकली भव्य शोभायात्रा

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फर्रुखाबाद। बढ़पुर स्थित सीएनआई चर्च में रविवार को पाम संडे (खजूर रविवार) का पर्व पूरे श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में मसीह समाज के लोग शामिल हुए। सुबह से ही चर्च परिसर में भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। चर्च के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं, जहां श्रद्धालु हाथों में फूलों से सजी खजूर की डालियां लेकर मसीह गीत गाते हुए प्रभु की आराधना के लिए पहुंच रहे थे।
पाम संडे के अवसर पर पास्टर हाउस से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बच्चे, महिलाएं और पुरुष खजूर की डालियां लेकर प्रभु यीशु मसीह के जयघोष करते हुए चर्च तक पहुंचे। पूरे मार्ग में भक्तिमय गीतों की गूंज से वातावरण आध्यात्मिक हो गया। चर्च परिसर में पहुंचने पर श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया गया, जिससे माहौल और भी श्रद्धामय हो उठा।
प्रार्थना सभा के दौरान चर्च के पादरी मनोज कुमार ने बाइबिल के पवित्र वचनों का पाठ करते हुए सभा का शुभारंभ किया। उन्होंने अपने प्रवचन में बताया कि पाम संडे का दिन प्रभु यीशु मसीह के येरुशलम में विजयी प्रवेश की स्मृति में मनाया जाता है। यह वही समय था जब प्रभु यीशु मानवता के उद्धार के लिए अपने बलिदान की ओर अग्रसर हुए थे। उन्होंने कहा कि खजूर की डालियां प्रेम, सम्मान और आत्मिक समर्पण का प्रतीक हैं, जो प्रभु के प्रति अटूट आस्था को दर्शाती हैं।
कार्यक्रम के दौरान संडे स्कूल के बच्चों ने ‘शांति का राजा आ रहा है, होवे जय-जयकार’ जैसे भजनों की प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया। बच्चों की प्रस्तुतियों से पूरा चर्च परिसर भक्तिरस में सराबोर हो गया। प्रार्थना सभा के समापन के बाद श्रद्धालुओं के बीच खजूर वितरित किए गए, जिसे उन्होंने आस्था और प्रेम के प्रतीक के रूप में ग्रहण किया।
इस धार्मिक आयोजन में राजीव के लाल, भावना लाल, विनीता, अमन मनीला, अजय जी लाल, आदित्य सहाय, विजय दयाल, रितेश ऑलिव, एलिस दयाल, डोरकास अबरार, सुनील विक्टर, वीना साइमन, निशा लाल, राहुल अबरार, सुषमा लाल, अनमोल लाल, प्रशांत एडसन सहित बड़ी संख्या में मसीह समाज के लोग उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और श्रद्धा का विशेष वातावरण देखने को मिला, जिसने पाम संडे के महत्व को और भी प्रभावशाली बना दिया।

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