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Thursday, March 19, 2026

विश्वास मत में दमदार जीत के साथ सत्ता पर मजबूत पकड़: अनुतिन चर्नविराकुल रहेंगे थाईलैंड के प्रधानमंत्री

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थाईलैंड। राजनीति में स्थिरता का संकेत देते हुए प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने संसद में विश्वास मत जीत लिया है। गुरुवार को हुए इस महत्वपूर्ण मतदान में उन्होंने स्पष्ट बहुमत हासिल कर अपने पद पर बने रहने का रास्ता साफ कर लिया।

संसद में कुल 498 सदस्यों में से 293 सांसदों ने उनके पक्ष में मतदान किया। यह आंकड़ा बहुमत के लिए आवश्यक संख्या से काफी अधिक है, जिससे उनकी स्थिति और मजबूत हो गई है।

इस जीत के बाद अब औपचारिक प्रक्रिया के तहत उन्हें थाईलैंड के राजा महा वजिरालोंगकोर्न से नियुक्ति की पुष्टि मिलेगी। इसके बाद वह औपचारिक रूप से अपना कार्यभार संभालेंगे।

अनुतिन की पार्टी भूमजईथाई पार्टी ने फरवरी में हुए आम चुनावों में शानदार प्रदर्शन करते हुए 191 सीटें जीती थीं। हालांकि पूर्ण बहुमत से दूर रहने के कारण उन्हें गठबंधन का सहारा लेना पड़ा।

उन्होंने फेउ थाई पार्टी, जिसे 74 सीटें मिलीं, और अन्य सहयोगी दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई है। इस गठबंधन ने संसद में स्थिर बहुमत सुनिश्चित किया है।

दूसरी ओर, 120 सीटों के साथ पीपुल्स पार्टी विपक्ष की भूमिका में रहेगी और सरकार को चुनौती देती रहेगी।

59 वर्षीय अनुतिन इससे पहले पिछले साल सितंबर में प्रधानमंत्री बने थे। उन्होंने उस समय सत्ता संभाली थी जब राजनीतिक परिस्थितियां काफी अस्थिर थीं।

उनसे पहले प्रधानमंत्री रहीं पैतोंगतार्न शिनावात्रा को नैतिकता के उल्लंघन के आरोपों के चलते पद छोड़ना पड़ा था, जिसके बाद सत्ता परिवर्तन हुआ।

अनुतिन ने कंबोडिया के साथ सीमा विवाद के दौरान खुद को एक मजबूत नेता के रूप में पेश किया। इस दौरान उनकी छवि देश के रक्षक के रूप में उभरी, जिससे उनकी लोकप्रियता में काफी इजाफा हुआ।

हालांकि, नई सरकार के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जिसका सीधा असर थाईलैंड की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

इसके अलावा, देश में बढ़ती महंगाई भी आम जनता के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ सकता है।

सबसे बड़ी चुनौती संवैधानिक अदालत का आगामी फैसला होगा, जिसमें यह तय किया जाएगा कि हाल ही में हुए चुनाव पूरी तरह वैध थे या नहीं। चुनाव आयोग पर गुप्त मतदान के नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे हैं, जो राजनीतिक अस्थिरता को फिर से जन्म दे सकते हैं।

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