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Wednesday, February 4, 2026

भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में नई शुरुआत, टैरिफ कटौती और 500 अरब डॉलर निवेश से बदलेगा समीकरण

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भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में नई शुरुआत, टैरिफ कटौती और 500 अरब डॉलर निवेश से बदलेगा समीकरण
वाशिंगटन।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगाया गया पारस्परिक टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही लंबे समय से अटके भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी सहमति बन गई है, जिसे दोनों देशों के लिए अहम कूटनीतिक और आर्थिक कदम माना जा रहा है।

इस फैसले के बाद व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अहम जानकारियां साझा कीं। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर निवेश का वादा किया है, जिससे अमेरिका में रोजगार और विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

कैरोलिन लेविट ने बताया कि पीएम मोदी ने रूस से तेल खरीद कम करने और अमेरिका से तेल आयात बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत भविष्य में वेनेजुएला से भी तेल खरीद सकता है, जिससे अमेरिका को अप्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।

वॉशिंगटन में मीडिया से बात करते हुए लेविट ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका में ऊर्जा, परिवहन और कृषि क्षेत्र में करीब 500 अरब डॉलर के निवेश का आश्वासन दिया है। उनके मुताबिक यह निवेश अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा और लाखों रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है।

लेविट ने इस समझौते को राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच मजबूत और सौहार्दपूर्ण संबंधों का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच सीधी बातचीत के बाद ये बड़े फैसले लिए गए हैं, जो दोनों देशों के आपसी भरोसे और रणनीतिक साझेदारी को दर्शाते हैं।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ नीति की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह बढ़ा रहे हैं और देश में विनिर्माण गतिविधियों को गति मिल रही है। इसके चलते अमेरिका में नए कारखाने लग रहे हैं और रोजगार के अवसर बढ़े हैं।

लेविट के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी निर्माण क्षेत्र में रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण यह है कि कंपनियां अब अमेरिका में ही उत्पादन कर रही हैं, जिससे घरेलू कामगारों को सीधा लाभ मिल रहा है।

गौरतलब है कि पिछले एक साल से भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर तनाव बना हुआ था। ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए ऊंचे शुल्क और रूसी तेल खरीद पर अतिरिक्त जुर्माने ने रिश्तों में खटास पैदा कर दी थी। अब टैरिफ घटाने और जुर्माना हटाने के फैसले से दोनों देशों के संबंधों में नई ऊर्जा आई है।

रविवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की थी कि भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है और रूसी तेल से जुड़े अतिरिक्त 25 प्रतिशत जुर्माने को भी हटाया जाएगा। इसके साथ ही व्यापार समझौते पर सहमति जताकर उन्होंने भारत के साथ रिश्ते मजबूत करने का संकेत दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्रंप के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि टैरिफ में कटौती से भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। हालांकि, व्यापार समझौते की सभी शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी के लिए एक बड़ा और निर्णायक कदम मान रहे हैं।

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